सावधान पाकिस्तान! टैरिफ टेंशन के बीच US ने भेजा उड़ता टैंक, पश्चिमी मोर्चे पर और ताकतवर हुई वायु सेना
अमेरिका के साथ 2020 में 600 मिलियन डॉलर के समझौते के तहत, सेना को मई-जून 2024 तक सभी छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की उम्मीद थी। हालांकि, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण समय सीमा को दिसंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया था।

भारतीय सेना को अमेरिका से तीन और AH-64E अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टरों का अंतिम जत्था मिल चुका है। इसके साथ ही राजस्थान के जोधपुर स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में छह हेलीकॉप्टरों का बेड़ा पूरा हो गया। मंगलवार को तीनों अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टर राजधानी नई दिल्ली से सटे गाजियाबाद के हिंडन हवाई अड्डे पर उतरे। अमेरिका ने यह आपूर्ति ऐसे वक्त में की है, जब टैरिफ के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनातनी जारी है।
सभी छह उन्नत हमलावर हेलीकॉप्टर जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जिससे पाकिस्तान सीमा पर सेना की मारक क्षमता मजबूत होगी। ये आधुनिक हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइलों से लैस हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पश्चिमी सीमा की रक्षा को ये हेलीकॉप्टर और मजबूत करेंगे। ये दुनिया के सबसे आधुनिक अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जिन्हें 'हवा में उड़ता हुआ टैंक' कहा जाता है। ये जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जहां पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा पर सेना की मारक क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी।
अपाचे हेलीकॉप्टरों का अनुबंध फरवरी 2020 में हुआ था, जिनमें से पहले तीन हेलीकॉप्टर का बैच लगभग 15 महीने की देरी के बाद जुलाई में भारत पहुंचा था। अपाचे हेलीकॉप्टरों को सेना की आक्रमण क्षमता के हिस्से के रूप में पश्चिमी सीमा पर तैनात किया गया है। इससे पहले, सूत्रों ने संकेत दिया था कि अपाचे हेलीकॉप्टरों के अंतिम बैच को भारत लाने के बाद असेंबल और निरीक्षण किया जाएगा।
अपनी मारक क्षमता और युद्धक्षेत्र में अत्यधिक टिकाऊपन के कारण AH-64E अपाचे को विश्व स्तर पर सेवा में मौजूद सबसे उन्नत बहुउद्देशीय लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है। एरिज़ोना के मेसा में निर्मित, यह अमेरिकी सेना के आक्रमण बेड़े का एक प्रमुख हेलीकॉप्टर है और भारत सहित कई सहयोगी देशों द्वारा भी इसका उपयोग किया जाता है। हेलफायर मिसाइलों, 70 मिमी रॉकेटों और 30 मिमी चेन गन से लैस यह हेलीकॉप्टर दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और हवाई सुरक्षा प्रणालियों को नष्ट कर सकता है। उन्नत सेंसर, रात्रि-लड़ाई की क्षमता और नेटवर्कयुक्त युद्ध प्रणालियाँ इसे उच्च जोखिम वाले और पहाड़ी युद्धक्षेत्रों में घातक बनाती हैं।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




