Hindi NewsIndia NewsOwner Saddened by Death of his Beloved Horse held Memorial Service for its Soul Printed Cards and Invited Relatives
प्यारे घोड़े की मौत से मालिक दुखी, आत्मिक शांति के लिए रखा श्रद्धांजलि समारोह, कार्ड छपाए-रिश्तेदार भी बुलाए

प्यारे घोड़े की मौत से मालिक दुखी, आत्मिक शांति के लिए रखा श्रद्धांजलि समारोह, कार्ड छपाए-रिश्तेदार भी बुलाए

संक्षेप: चरणजीत सिंह मिंटा ने बताया कि घोड़े पालना और उनसे प्यार करना उनके खून में है। 3 पीढ़ियों से घोड़े पाल रहे हैं। इससे पहले उनके पिता और दादा भी घोड़े पालते थे। फतेहजंग घोड़े का जन्म उनके घर में ही हुआ।

Wed, 15 Oct 2025 03:38 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, चंडीगढ़
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पंजाब के लुधियाना से इंसान और एक घोड़े की अनोखी और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। अपने घोड़े फतेहजंग की मौत से इसके मालिक खासी कलां के रहने वाले चरणजीत सिंह मिंटा इतने दुखी हुए कि उन्होंने आत्मिक शांति के लिए भोग समागम तक रख दिया है। इसके लिए बाकायदा कार्ड छपवाए और गुरुद्वारा साहिब में कार्यक्रम रखा, जिसमें सभी जान-पहचान वालों और रिश्तेदारों को न्योता दिया गया है। भोग समागम आज होगा।

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फतेहजंग को मानते थे अपना तीसरा बेटा

चरणजीत सिंह मिंटा ने बताया कि घोड़े पालना और उनसे प्यार करना उनके खून में है। 3 पीढ़ियों से घोड़े पाल रहे हैं। इससे पहले उनके पिता और दादा भी घोड़े पालते थे। फतेहजंग घोड़े का जन्म उनके घर में ही हुआ। बचपन से ही वह बहुत दोस्ताना था। उसका रंग नीला था इसलिए उससे उनको प्यार हो गया। वो और उनकी पत्नी उसे अपना बच्चा मानने लगे। बच्चे विदेश में थे तो सारा दिन इसी के साथ गुजारते थे।

चरणजीत के 2 बेटे विदेश में रहते हैं। वह पत्नी के साथ लुधियाना में रहते हैं। चरणजीत सिंह ने कहा कि जब भी कोई पूछता है कि आपके कितने बच्चे हैं तो वो एकदम से जवाब देते हैं कि 3 बच्चे हैं। बड़े बेटे का नाम गुरइकबाल सिंह आस्ट्रेलिया, दूसरे का नाम मनलोचन सिंह यूएसए और तीसरे बेटे का नाम फतेह जंग सिंह इंडिया बताते हैं।

अचानक अंगों ने काम करना बंद कर दिया

चरणजीत सिंह ने बताया कि फतेह जंग की उम्र 38 महीने थी। वह बिल्कुल स्वस्थ था। 8 अक्टूबर को अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और उसकी मौत हो गई। मौत के बाद उसके टेस्ट करवाए तो पता चला कि उसे अंगों ने अचानक काम करना बंद कर दिया, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। इस से उन्हें बहुत आघात लगा और वह उदास रहने लगे। चरणजीत सिंह फतेहजंग को पूरे उत्तर भारत में प्रदर्शनियों में लेकर जाते थे। लोग उसे बहुत पसंद करते थे। उन्होंने बताया कि इसी साल इसे लेकर जोधपुर के महाराजा के पास भी गए थे। उन्होंने भी इसकी तारीफ की थी।

जब फतेहजंग की मौत हुई तो चरणजीत सिंह मिंटा उदास रहने लगे। उनके रिश्तेदारों को जैसे ही पता चला तो वो पटियाला से एक नीले रंग का घोड़ा लेकर उनके पास आए और उन्हें दे दिया। चरणजीत ने कहा कि नए घोड़े का नाम भी उन्होंने फतेहजंग ही रखा है।

रिपोर्ट: मोनी देवी

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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