Hindi NewsIndia NewsOwaisi reprimanded Jammu and Kashmir CM Omar Abdullah for talking about repealing PSA law
सब लुटा कर होश आया... PSA कानून खारिज करने की बात कर रहे उमर पर ओवैसी का शायराना तंज

सब लुटा कर होश आया... PSA कानून खारिज करने की बात कर रहे उमर पर ओवैसी का शायराना तंज

संक्षेप:

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान पर ओवैसी ने कहा कि यह कानून 1978 में आया था। उसके बाद से राज्य के कई सीएम बदल गए, कोई भी चाहता तो इस कानून को आसानी से हटा सकता था, लेकिन सभी ने इसका दुरुपयोग किया।

Sun, 19 Oct 2025 05:27 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Asaduddin Owaisi: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान के ऊपर हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने प्रतिक्रिया जाहिर की है। दरअसल, शनिवार को मीडिया से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनावी अभियान के दौरान वादा किया था कि वह सत्ता में आते ही पीएसए (जन सुरक्षा अधिनियम) को हटा देंगे। लेकिन फिलहाल क्योंकि अभी पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है, इसलिए वह ऐसा करने में असमर्थ हैं। अब्दुल्ला की इस टिप्पणी को लेकर ओवैसी ने उनको रिएल्टी चेक दे दिया।

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सोशल मीडिया साइट एक्स पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के बयान को रिपोस्ट करते हुए ओवैसी ने उन पर शुरुआत में इस कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, "तस्करी से निपटने के लिए शेख अब्दुल्ला ने 1978 में जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लागू किया था। उनके बाद फारुख अब्दुल्ला, जी. एम. शाह, मुफ्ती सईद, गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सभी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यह सभी अपने कार्यकाल के दौरान इसे आसानी से हटा सकते ते और कई लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोक सकते थे।"

ओवैसी ने सभी को लपेटा

ओवैसी ने अपनी पोस्ट में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत वर्तमान मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा, "लगभग हर निर्वाचित मुख्यमंत्री और अनिर्वाचित राज्यपाल ने इस कानून का दुरुपयोग किया है। 1978 से अब तक 20,000 से ज़्यादा लोगों को बिना किसी आपराधिक आरोप, निष्पक्ष सुनवाई या यहाँ तक कि उचित अपील प्रक्रिया के जेल में डाल दिया गया है। कुछ लोगों की नजरबंदी 7-12 साल तक बढ़ा दी गई। एक अलगाववादी को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में जब उसकी जरूरत पड़ी, तो उसे अदालती वारंट जारी कर जमानत दे दी गई। अब एक छोटी निर्वाचित सरकार है, और उसे PSA को हटाने का विचार आया है।"

इसके बाद ओवैसी ने शायराना अंदाज में तंज कसते हुए लिखा, "सब कुछ लूटा के होश में आये तो क्या किया। दिन में अगर चिराग जले तो क्या किया।"

एक्ट की क्या सच्चाई

आपको बता दें उमर अब्दुल्ला जिस एक्त को रद्द करने की बात कर रहे हैं। उसे 1978 में लाया गया था। तब उसका मूल उद्देश्य राज्य में लकड़ी की अवैध तस्करी को रोकना था। लेकिन बाद में इसे राजनीतिक, आतंकवाद संबंधी और सार्वजनिक व्यवस्था के मामले में भी इस्तेमाल किया जाने लगा। इस कानून के तहत प्रशासन किसी भी व्यक्ति को बिना कोर्ट में पेश किए हिरासत में रख सकता है। इसके अलावा व्यक्ति को करीब 2 साल तक बिना किसी मुकदमें के जेल में रखा जा सकता है।

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जब राज्य से धारा 370 को हटाया था, उसके बाद भी उन्होंने राज्य में पीएसए के कानून को बरकरार रखा था। उस समय पर इसी कानून के तहत राज्य के मुख्य नेताओं को हिरासत में रखा गया था। इसमें उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला शामिल थे।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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