यह भारत का अपमान... ऑपरेशन सिंदूर पर चीन के दावे को लेकर ओवैसी के सरकार से तीखे सवाल
हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत पाकिस्तान संबंधों के लेकर चीन की तरफ से किए गए दावों की आलोचना की है। उन्होंने इन दावों को भारत का अपमान बताते हुए सरकार से इसका तुरंत आधिकारिक खंडन करने और चीन को जवाब देने का आग्रह किया।

भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अमेरिका के बाद अब चीन के दावों ने नया हंगामा खड़ा कर दिया है। एआईएमआईएम पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चीन के विदेश मंत्री की तरफ से किए गए मध्यस्थता के दावों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए भारत की संप्रभुता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं उन्होंने केंद्र सरकार से भी सवाल पूछा कि क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी थी?
सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी बात रखते हुए हैदराबाद सांसद ने सरकार से इस बयान का आधिकारिक तौर पर खंडन करने की मांग की। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमारे घोषित करने से पहले ही युद्ध विराम की घोषणा कर दी और यह दावा किया कि उन्होंने व्यापार प्रतिबंधों के जरिए शांति सुनिश्चित की है। अब ऐसी ही बात चीन के विदेश मंत्री भी कर रहे हैं। यह भारत के लिए अपमान की बात है, सरकार को इसका कड़ा जवाब देना चाहिए। चीन के साथ संबंधों का सामान्यीकरण भारत के सम्मान या संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकता।"
उन्होंने कहा, "चीनी विदेश मंत्री का यह कहना कि बीजिंग ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की है, हैरान करने वाला है। भारत सरकार को इसका आधिकारिक तौर पर खंडन करना चाहिए और देश की जनता को भरोसा दिलाना चाहिए कि भारत के सम्मान और संप्रभुता की कीमत पर चीन के साथ संबंधों का सामान्यीकरण नहीं होगा।"
गौरतलब है कि ओवैसी की यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी की तरफ से भारत-पाकिस्तान के बीच में मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद मध्यस्थता का दावा किया गया था। उनकी तरफ से कहा गया कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराई और तनाव कम करने में मदद की थी। हालांकि, अभी तक भारत सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
खुद को श्रेष्ठ साबित करना चाहता है चीन: ओवैसी
औवेसी ने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान को एक की पलड़े में रखकर खुद को एशिया में श्रेष्ठ साबित करना चाहता है। सरकार को इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा, "एक तरफ चीन पाकिस्तान को 81 फीसदी हथियार सप्लाई करता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे रियल टाइम इंटेलिजेंस भी देता है, और अब खुद को मध्यस्थ भी बता रहा है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है, एक देश के तौर पर हम कभी इसे स्वीकार नहीं कर सकते।"
उन्होंने सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र को बताना चाहिए कि पीएम मोदी की चीन यात्रा के दौरान क्या इस बात पर भी सहमति बनी थी?"
आपको बता दें, चीनी विदेश मंत्री के मध्यस्थता वाले दावे के बाद भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश ने भी बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ मजाक करार दिया था।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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