
उमर खालिद-शरजील इमाम की लंबी हिरासत के लिए कांग्रेस पर बरसे ओवैसी, मगर क्यों?
ओवैसी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने 2 विचाराधीन आरोपियों को जमानत नहीं दी और कोर्ट ने जमानत न देने की वजह भी बताई। यूपीए सरकार के दौरान UAPA में संशोधन किया गया था और उसमें आतंकवाद की परिभाषा शामिल की गई।'
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के सख्त प्रावधानों को मजबूत करने में भूमिका निभाई। ओवैसी ने कहा कि जब पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे, तब कांग्रेस ने UAPA में संशोधन किए, जिसके कारण विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक जेल में रखा जा रहा है, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम भी शामिल हैं। धुले में एक कार्यक्रम में बोलते हुए ओवैसी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने 2 विचाराधीन आरोपियों को जमानत नहीं दी और कोर्ट ने जमानत न देने की वजह भी बताई। यूपीए सरकार के दौरान UAPA में संशोधन किया गया था और उसमें आतंकवाद की परिभाषा शामिल की गई।'
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोकसभा में पहले दिए गए अपने भाषण में उन्होंने UAPA के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे और उन्हें सब्जेक्टिव बताया था। उन्होंने कहा, "मैं 2007 या 2008 की बात कर रहा हूं। मैंने संसद में कहा था कि कृपया मूल अधिनियम की धारा 15 (a) देखें, जो कहती है 'किसी भी अन्य तरीके से चाहे जिस प्रकृति का हो जिससे भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा आदि को खतरा हो या संभावित खतरा हो।' यह बहुत व्यक्तिपरक है। कल अरुंधति रॉय को उनकी लिखी चीजों के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। यह व्यक्तिपरक है और इसे कौन परिभाषित करेगा?" ओवैसी ने कहा कि खालिद और इमाम को जमानत न देने का आधार वही है, जिस पर उन्होंने लोकसभा में पहले बात की थी।
UAPA कानून की खामियों को बताया
AIMIM चीफ ने कहा, "कांग्रेस ने जिस 'किसी भी अन्य तरीके से' के आधार पर कानून बनाया था, जिसके दुरुपयोग की मैंने पहले ही चेतावनी दी थी, आज उसी के आधार पर दो युवा 5 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं और जमानत नहीं मिल रही। कानून बनाने वाले कांग्रेस के लोग थे और गृह मंत्री चिदंबरम थे। क्या आजादी के बाद कांग्रेस का कोई नेता एक साल, दो साल या साढ़े पांच साल जेल में रहा है?" ओवैसी ने UAPA की धारा 43D का जिक्र किया, जो चार्जशीट दाखिल होने से पहले 180 दिनों तक हिरासत की अनुमति देती है।
हिरासत की अवधि पर उठाए सवाल
ओवैसी ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों के मामलों में इसकी अधिकतम अवधि का नियमित इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा, "मेरे इस भाषण का लोकसभा में रिकॉर्ड है। मैंने धारा 43D के तहत 180 दिनों की हिरासत की बात की थी। मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूं कि अल्पसंख्यकों को गिरफ्तार करने वाले 100 प्रतिशत मामलों में उन्हें चार्जशीट से पहले 180 दिनों तक हिरासत में रखा जाएगा। मैंने कहा था कि जमीनी हकीकत और उम्मीद में बहुत फर्क है। वर्दीधारी व्यक्ति के मन में नफरत की भावना होती है। यह मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अनुसार एक सच्चाई है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि उन्हें 180 दिनों के लिए हिरासत में रखा जाएगा।"





