ओम बिरला के बाद ज्ञानेश कुमार की बारी, महाभियोग प्रस्ताव लाएगा विपक्ष; कितने सांसदों का चाहिए समर्थन?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। प्रस्ताव को विशेष बहुमत से पास कराना होगा, यानी सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई वोट।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद अब कांग्रेस देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी ऐसा ही प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है। विपक्षी पार्टियों के 2 सीनियर नेताओं ने सोमवार को इसके संकेत दिए हैं। जानकारी के मुताबिक ओम बिरला के अविश्वास प्रस्ताव के निपटारे के बाद, विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाने पर विचार कर रहा है। अगर विपक्ष संसद में महाभियोग का नोटिस देता है, तो देश में पहली बार होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग आएगा।
एक सीनियर कांग्रेस नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि SIR के विरोध में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा, "इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के साथ बातचीत हुई है और सभी पार्टियां अलग-अलग राज्यों में वोटर रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तैयार हैं।" कांग्रेस नेता ने कहा, “यह बारी बारी से होगा। हमें उम्मीद है कि बिरला के खिलाफ नोटिस पर मंगलवार को विचार किया जाएगा।”
क्या कहता है कानून?
बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। इसके बाद ही इससे जुड़े नोटिस को विचार के लिए स्वीकार किया जाता है। वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनके कार्यों से संबंधित 2023 के कानून के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से केवल उसी प्रकार और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। दूसरे शब्दों में, इसका मतलब यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद के दोनों सदनों में महाभियोग के माध्यम से ही हटाया जा सकता है।
किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है प्रस्ताव
CEC को पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को पास होने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, यानी प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।
यह खबरें ऐसे समय में सामने आई हैं जब विपक्ष ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की लगातार आलोचना की है। बीते साल कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे लेकर बड़ा अभियान शुरू किया था और आयोग पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई।
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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