
ऑपरेशन सिंदूर में दिखा कमाल, 850 सुसाइड ड्रोन खरीदने की तैयारी; रेंज में इस्लामाबाद भी
कामिकेज (सुसाइड) ड्रोनों की खरीद के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है। पारंपरिक प्रक्रिया में जहां दो साल लग सकते थे, वहीं फास्ट-ट्रैक के जरिए कुछ ही महीनों में ट्रायल और ऑर्डर पूरे कर लिए जाएंगे।
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना अब ड्रोन केंद्रित युद्ध कौशल की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। सेना जल्द ही स्वदेशी 'सुसाइड ड्रोन' का एक बड़ा बेड़ा शामिल करने जा रही है, जो दुश्मन के ठिकानों पर सीमा के पार जाकर सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआती कीमत 2,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। भारतीय सेना की इस नई रणनीति के तहत 15-20 'शक्तिबाण' रेजिमेंट बनाई जा रही हैं। ये विशेष रेजिमेंट स्वार्म ड्रोन, सुसाइड ड्रोन और लंबी दूरी के यूएवी (UAV) से लैस होंगी, जिनकी मारक क्षमता 5 किमी से लेकर 500 किमी तक होगी।
इसके साथ ही हर इन्फैंट्री बटालियन में एक 'अश्नि' प्लाटून तैयार की जा रही है, जिसका काम विशेष रूप से इन घातक ड्रोनों का संचालन करना होगा। थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने हर सैनिक को ड्रोन तकनीक से लैस करने के लिए 'ईगल ऑन एवरी आर्म' का कॉन्सेप्ट पेश किया है।
फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया से होगी 850 ड्रोनों की खरीद
सेना ने 850 स्वदेशी कामिकेज (सुसाइड) ड्रोनों की खरीद के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है। पारंपरिक प्रक्रिया में जहां दो साल लग सकते थे, वहीं फास्ट-ट्रैक के जरिए कुछ ही महीनों में ट्रायल और ऑर्डर पूरे कर लिए जाएंगे। यह ऑर्डर दो सबसे कम बोली लगाने वाली (L1 और L2) कंपनियों के बीच 60:40 के अनुपात में बांटा जाएगा। ये ड्रोन भारी जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप वाले इलाकों में भी सटीक निशाना साधने में सक्षम होंगे।
स्वदेशी कंपनियों के बीच मुकाबला
'मेक इन इंडिया' के तहत इस प्रोजेक्ट में केवल भारतीय कंपनियां ही हिस्सा ले सकेंगी। दौड़ में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL), अडानी डिफेंस, सोलर डिफेंस (नागस्त्र बनाने वाली कंपनी), न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज के अलावा Nibe डिफेंस, ए-विज़न और SMPP जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली सीख
हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे मिशनों में ड्रोनों का प्रभावी उपयोग किया है, जिससे आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में मदद मिली। वर्तमान में सेना के पास 'नागस्त्र-1' जैसे स्वदेशी ड्रोन पहले से ही मौजूद हैं, जो इजरायली और पोलिश ड्रोनों की तुलना में लगभग 40% सस्ते और अधिक प्रभावी साबित हुए हैं। वर्ष 2026 को सेना ने 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष' घोषित किया है, जिसमें एआई (AI) आधारित युद्ध उपकरणों पर जोर दिया जाएगा।

लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
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