ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाक के परमाणु ठिकाने पर किया था हमला; टॉम कूपर बोले- सबूत है
कूपर ने आधिकारिक इनकार के बावजूद अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि उनके पास हमले की पुष्टि करने वाले कई सबूत हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले का समय और तरीका यह दर्शाता है कि इसके पीछे का उद्देश्य केवल दुश्मन को रणनीतिक संदेश देना था।

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए संघर्ष को लेकर एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। मशहूर एविएशन इतिहासकार और विश्लेषक टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायु सेना (IAF) ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स स्थित परमाणु फैसिलिटी सेंटर पर हमला किया था। कूपर ने जोर देकर कहा है कि इस दावे के समर्थन में उनके पास प्रमाण भी मौजूद हैं।
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कूपर ने आधिकारिक इनकार के बावजूद अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि उनके पास हमले की पुष्टि करने वाले कई सबूत हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले का समय और तरीका यह दर्शाता है कि इसके पीछे का उद्देश्य केवल दुश्मन को रणनीतिक संदेश देना था।
कूपर ने विस्तार से बताया कि किराना हिल्स जैसे स्थान पर हमला करने का मतलब है कि आप बहुत अधिक क्षति पहुंचाए बिना एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। उनके अनुसार, भारत का संदेश सीधा और साफ था- “पाकिस्तान, सुन लो, हम जब चाहें, जहां चाहें और जितनी चाहें उतनी गोला-बारूद के साथ तुम्हें भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अब बस बहुत हुआ।" उन्होंने कहा कि यह हमला पाकिस्तानी नेतृत्व को उनकी सीमाओं का एहसास कराने के लिए एक कठोर चेतावनी थी।
यह पहली बार नहीं है जब टॉम कूपर ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ही कूपर ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए भारतीय रक्षा जनसंपर्क (PR) की आलोचना की थी कि वे किराना हिल्स के पास कथित हमले को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं।
वायु सेना की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कूपर ने लिखा था, "भारत और भारतीय वायु सेना का पीआर वर्क... आश्चर्य है। वाइस एयर चीफ मार्शल नागेश कपूर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जहां किसी ने उनसे 10 मई 2025 को '88-आवर्स वॉर' के दौरान किराना हिल्स स्थित पाकिस्तान के प्रमुख हथियार भंडारण सुविधाओं में से एक पर भारतीय वायु सेना के हवाई हमलों के बारे में पूछा था।"
कूपर के मुताबिक, कपूर ने इसका जवाब क्लासिक भारतीय वायु सेना के अंदाज में दिया। उन्होंने कहा था, “हमें इसके बारे में पता नहीं है। ये वीडियो उनके लोगों द्वारा पेश किए गए थे। उन्होंने ही उन्हें बनाया है। हमने कुछ नहीं किया।"
टॉम कूपर ने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए हमले के तुरंत बाद की राजनयिक गतिविधियों का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि हमले के समय और उसके बाद की राजनयिक हलचल को एक साथ जोड़कर देखने पर पूरी तस्वीर साफ हो जाती है।
कूपर ने बताया कि हमले के बाद पाकिस्तान के द्वारा अमेरिका और भारत के साथ संपर्क स्थापित करना और युद्धविराम के लिए जोर देना इन घटनाओं के क्रम को स्पष्ट करता है। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि पाकिस्तान सीधे तौर पर युद्धविराम की 'भीख' मांग रहा था, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि हमले के बाद जो घटनाक्रम हुआ वह सब कुछ बयां करने के लिए काफी है और स्थिति इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकती।
जब कूपर से उनके दावों के पीछे के ठोस सबूतों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कई संकेतकों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो में मिसाइल के निशानों को पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने धुएं के गुबारों का जिक्र किया जो पाकिस्तानी वायु सेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से उठ रहे थे।
कूपर ने दावा किया, "सबूत इतने स्पष्ट हैं कि भारतीय वायु सेना ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाया ताकि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को अक्षम किया जा सके और फिर भूमिगत भंडारण सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया।"
किराना हिल्स के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “किराना हिल्स पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के केंद्रबिंदुओं में से एक है। उन्होंने वहां 20-24 गैर-महत्वपूर्ण परमाणु परीक्षण किए हैं। मेरा मतलब है, यह कोई डिज्नीलैंड नहीं है।"
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एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
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