
मतदान अधिकारी भी समझ नहीं पाए, एसआईआर पर क्या बोले स्टालिन; पार्टी कार्यकर्ताओं को क्या निर्देश
संक्षेप: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एसआईआर को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को तो यहां के बूथ स्तर के अधिकारी भी समझ नहीं पाए। उन्होंने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एसआईआर को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को तो यहां के बूथ स्तर के अधिकारी भी समझ नहीं पाए। उन्होंने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य में एसआईआर के दौरान कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।

स्टालिन ने कहा कि जनता के साथ उनकी बातचीत से पता चला कि एसआईआर के बारे में लोगों में जागरूकता अपर्याप्त है। द्रमुक अध्यक्ष के तौर पर स्टालिन ने कहा कि कई जगहों पर लोगों ने कहा कि बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) जैसे मतदान अधिकारी भी इसे नहीं समझ पाए। उन्होंने द्रमुक मुख्यालय से सत्तारूढ़ पार्टी के जिला सचिवों के साथ एक ऑनलाइन बातचीत के दौरान, स्टालिन ने पार्टी पदाधिकारियों और निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारियों को एसआईआर से संबंधित कार्यों में सतर्क रहने का निर्देश दिया।
स्टालिन ने संदेश में कहा कि हमारे लगातार विरोध के बावजूद, एसआईआर का काम शुरू हो गया है। बहुत से लोग अब भी इस प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। इसलिए, यह वीडियो यह समझाने के लिए है कि द्रमुक एसआईआर का विरोध क्यों कर रही है और लोगों को उनके मताधिकार की रक्षा के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि लोग हेल्पलाइन नंबर 08065420020 पर संपर्क कर अपनी शंकाएं दूर कर सकते हैं।
द्रमुक ने एसआईआर के समय, विशेषकर राज्य में वर्तमान उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान, इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाया है। पार्टी इसका विरोध करते हुए दावा कर रही है कि इस व्यापक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। महीने भर चलने वाले पुनरीक्षण अभियान पर चर्चा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर अभियान में एक भी पात्र मतदाता का नाम नहीं छूटना चाहिए। इसी प्रकार, यह भी सुनिश्चित करें कि अपात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल न हों।
पार्टी के एक सूत्र के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष ने द्रमुक के बूथ स्तर के एजेंटों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या जनता को एसआईआर के बारे में उचित जानकारी देकर फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं। बाद में एक वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एसआईआर राज्य के लोगों के मताधिकार को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इससे उनके मताधिकार छिनने का खतरा पैदा हो गया है।
एसआईआर पर उनकी पार्टी के रुख की आलोचना करने के लिए भाजपा समेत अन्य दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस क्षण राज्य सरकार के कर्मचारियों को चुनाव कार्य के लिए नियुक्त किया जाएगा, वे केवल निर्वाचन आयोग के प्रति जवाबदेह हो जाएंगे।





