सोनम वांगचुक का समर्थन करने क्यों नहीं आए उमर अब्दुल्ला? जम्मू-कश्मीर CM ने बताई वजह
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जंतर मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों की मांगे गलत नहीं हैं। कई नेता उनसे मिलने गए हैं। हम भी जाने वाले थे…

Sonam Wangchuk Omar Abdullah: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार में इतनी मानवीय संवेदना और करुणा होना चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति भूख हड़ताल पर बैठा है। उससे बातचीत की जाए। 20 तारीख को दिल्ली में आकर प्रदर्शन करने की योजना बना रहे उमर ने कहा कि अभी उनके चाचा का निधन हुआ है। इसलिए वह या उनकी पार्टी से कोई सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर नहीं गया है। अगर ऐसा नहीं होता, तो जरूर वह जंतर मंतर पर उनके समर्थन के लिए जाते।
गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने सोनम वांगचुक और उनके साथियों का समर्थन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हैरानी है कि 18 दिन के अनशन के बाद भी सरकार ने अभी तक उनसे कोई बात नहीं की है। उन्होंने कहा, "हैरानी की बात है कि उन्हें अनशन पर बैठे 18 दिन हो गए हैं, शायद आज 19वां दिन है। उनका लगभग नौ किलोग्राम वजन कम हो गया है और इसका उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है और किसी भी तरह उनसे अनशन समाप्त करने की अपील नहीं कर रही। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन कहीं न कहीं इसमें मानवीय संवेदना और करुणा के लिए भी स्थान होना चाहिए।''
मनमोहन सिंह ने भी अन्ना हजारे से बात करने के लिए मंत्रियों को भेजा था-उमर अब्दुल्ला
जम्मू कश्मीर सीएम ने अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय भी ऐसी ही स्थिति बन रही थी। लेकिन मनमोहन सिंह सरकार ने उस समय पर अपने मंत्रियों को अन्ना हजारे से बात करने के लिए भेजा था। और बातचीत करने का प्रयास किया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने अभी तक सोनम वांगचुक से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख क्या होगा, यह तो नहीं पता, लेकिन हमें निश्चित रूप से वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता है।
चाचा का निधन नहीं होता, तो जरूर जाते- उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर उनके चाचा एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता मुस्तफा कमाल का निधन नहीं हुआ होता, तो उनकी पार्टी का कोई नेता वांगचुक के साथ प्रदर्शन में शामिल होता। उन्होंने कहा, ''यदि हम गमगीन नहीं होते, तो शायद हममें से कोई वहां जाता और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त करता। लेकिन वह हमारी बातें सुनने के लिए भूख हड़ताल पर नहीं बैठे हैं। उन्हें सरकार की ओर से आश्वासन मिलना चाहिए।''


