
पुरी रथ यात्रा में इस्तेमाल रथों के पहिए संसद भवन में किए जाएंगे स्थापित, लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी
वार्षिक रथ यात्रा के बाद देवताओं के तीनों रथों को हर साल खंडित कर दिया जाता है। नंदीघोष रथ के मुख्य बढ़ई बिजय महापात्र के अनुसार, कुछ प्रमुख भागों को छोड़कर हर साल रथों के निर्माण में नई लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
पुरी रथ यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए रथों के तीन पहिए संसद परिसर में स्थापित किए जाएंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। एक सीनियर अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। एसजेटीए ने अपने बयान में कहा, ‘पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दौरे के दौरान प्रशासन ने संसद परिसर में रथों के तीन पहिए स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। बिरला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।’

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ आज श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु का आशीर्वाद लिया। हम माननीय अध्यक्ष के प्रति अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने रथ यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए तीन रथों में से प्रत्येक रथ का एक पहिया संसद परिसर में प्रमुख स्थान पर स्थापित करने के हमारे प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की।’
आध्यात्मिक विरासत का स्थायी प्रतीक
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पुरी से सांसद संबित पात्रा के साथ पहुंचे बिरला का शुक्रवार को लायन्स गेट पर एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने स्वागत किया। पाधी ने कहा कि नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ), दर्पदलन (देवी सुभद्रा) और भगवान बलभद्र (तालध्वज) के रथों के पहिए दिल्ली ले जाकर ओडिशा की कालातीत संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में स्थापित किए जाएंगे। वार्षिक रथ यात्रा के बाद देवताओं के तीनों रथों को हर साल खंडित कर दिया जाता है। नंदीघोष रथ के मुख्य बढ़ई बिजय महापात्र के अनुसार, कुछ प्रमुख भागों को छोड़कर हर साल रथों के निर्माण में नई लकड़ी का उपयोग किया जाता है। खंडित रथ के हिस्सों को गोदाम में रखा जाता है और उनमें से कुछ नीलाम कर दिए जाते हैं, जिनमें पहिए भी शामिल हैं।





