Hindi NewsIndia NewsOdisha Wheels of chariots used in Puri Rath Yatra to be installed in Parliament
पुरी रथ यात्रा में इस्तेमाल रथों के पहिए संसद भवन में किए जाएंगे स्थापित, लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी

पुरी रथ यात्रा में इस्तेमाल रथों के पहिए संसद भवन में किए जाएंगे स्थापित, लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी

संक्षेप:

वार्षिक रथ यात्रा के बाद देवताओं के तीनों रथों को हर साल खंडित कर दिया जाता है। नंदीघोष रथ के मुख्य बढ़ई बिजय महापात्र के अनुसार, कुछ प्रमुख भागों को छोड़कर हर साल रथों के निर्माण में नई लकड़ी का उपयोग किया जाता है।

Sat, 30 Aug 2025 06:21 PMNiteesh Kumar भाषा
share Share
Follow Us on

पुरी रथ यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए रथों के तीन पहिए संसद परिसर में स्थापित किए जाएंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। एक सीनियर अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। एसजेटीए ने अपने बयान में कहा, ‘पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दौरे के दौरान प्रशासन ने संसद परिसर में रथों के तीन पहिए स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। बिरला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।’

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।
ये भी पढ़ें:मोदी के बाद किस भाजपा नेता को PM पद पर देखना चाहते हैं लोग? सर्वे में हुआ खुलासा

एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ आज श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु का आशीर्वाद लिया। हम माननीय अध्यक्ष के प्रति अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने रथ यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए तीन रथों में से प्रत्येक रथ का एक पहिया संसद परिसर में प्रमुख स्थान पर स्थापित करने के हमारे प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की।’

आध्यात्मिक विरासत का स्थायी प्रतीक

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पुरी से सांसद संबित पात्रा के साथ पहुंचे बिरला का शुक्रवार को लायन्स गेट पर एसजेटीए के मुख्य प्रशासक ने स्वागत किया। पाधी ने कहा कि नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ), दर्पदलन (देवी सुभद्रा) और भगवान बलभद्र (तालध्वज) के रथों के पहिए दिल्ली ले जाकर ओडिशा की कालातीत संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में स्थापित किए जाएंगे। वार्षिक रथ यात्रा के बाद देवताओं के तीनों रथों को हर साल खंडित कर दिया जाता है। नंदीघोष रथ के मुख्य बढ़ई बिजय महापात्र के अनुसार, कुछ प्रमुख भागों को छोड़कर हर साल रथों के निर्माण में नई लकड़ी का उपयोग किया जाता है। खंडित रथ के हिस्सों को गोदाम में रखा जाता है और उनमें से कुछ नीलाम कर दिए जाते हैं, जिनमें पहिए भी शामिल हैं।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।