ओडिशा में 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर बवाल, CEO बोले- पहले सत्यापन करो
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुषांत कुमार मिश्रा की ओर से कहा गया, ‘बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें मतदाता मौजूद होने के बावजूद उनके नाम हटा दिए गए या बिना फील्ड विजिट और उचित सत्यापन के नाम हटाए गए।’

ओडिशा में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर. एस. गोपालन ने सोमवार को निर्देश दिया कि लगभग 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाने से पहले उचित सत्यापन किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से उन 2 लाख लोगों के मामलों की जांच पर रोक लगाने को कहा है, जिन्होंने अपने नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कम से कम 50 प्रतिशत मामलों का दोबारा सत्यापन किया जाए।
राज्य में बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद CEO ने सभी जिलों के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को मतदाता सूची की गहन जांच करने का आदेश दिया। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने मौत या स्थान परिवर्तन के आधार पर करीब 9.8 लाख नाम हटाने के लिए चिन्हित किए थे। हालांकि, गोपालन ने स्पष्ट किया कि BLO को नाम हटाने का अधिकार नहीं है, अंतिम फैसला ERO ही लेंगे। CEO ने बताया कि ओडिशा में हर साल आमतौर पर 7 से 9 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 9.8 लाख तक पहुंच गई है। इसका कारण आगामी SIR प्रक्रिया से पहले शुरू किया गया मैपिंग अभियान है।
राजनीतिक दलों ने जताई गहरी चिंता
इस बीच, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। बीजद के वरिष्ठ नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि इस बार सामान्य से लगभग 3 लाख अधिक नाम हटाए गए हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि आगे और नाम हटाए जा सकते हैं। उन्होंने पहले भी चुनाव आयोग से मांग की थी कि रोजगार के लिए बाहर जाने वाले लोगों के नाम सूची से न हटाए जाएं। बीजद नेता प्रसन्न आचार्य ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची को राजनीतिक आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए। वहीं, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मतदाता सूची तैयार करने में सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को शामिल करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुषांत कुमार मिश्रा की ओर से जारी पत्र में कहा गया, 'बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें मतदाता मौजूद होने के बावजूद उनके नाम हटा दिए गए या बिना फील्ड विजिट और उचित सत्यापन के नाम हटाए गए। इसलिए सभी ERO को निर्देश दिया गया है कि वे विशेष रूप से मृत घोषित मतदाताओं के मामलों की भी गहन जांच करें।' इससे पहले मार्च में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया था कि जून 2025 से 22 मार्च 2026 तक करीब 7.68 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। मतदाताओं की सुविधा के लिए CEO कार्यालय ने टोल-फ्री हेल्पलाइन 1950 भी शुरू की है, जहां लोग अपनी वोटर सूची में स्थिति जांच सकते हैं, शिकायत दर्ज कर सकते हैं या सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
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Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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