सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर हुई 38, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी
अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। कानून के विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों को और तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट में 81,394 लंबित मामले थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सहित जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने संबंधी अध्यादेश जारी कर दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बारे में विधि एवं न्याय मंत्रालय के प्रस्ताव को पहले ही स्वीकृति प्रदान कर दी थी और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या तय करने वाले कानून में संशोधन करने का निर्णय किया गया। राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत संसद के सत्रावसान की अवधि में अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। सत्र शुरू होने पर अध्यादेश के स्थान पर सरकार को विधेयक लाना पड़ता है। फिलहाल अध्यादेश ही कानून के रूप में काम करेगा और अब चार और न्यायाधीशों की नियुक्ति की जा सकती है।
अध्यादेश को गजट में 16 मई को अधिसूचित कर दिया गया है। विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अध्यादेश की जानकारी रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने "सुप्रीम कोर्ट(न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026" जारी करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) हो जायेगी। इस अध्यादेश के जरिए "सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956" में संशोधन किया गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गत पांच मई को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन किया जायेगा। इससे उच्चतम न्यायालय में में न्यायाधीशों की संख्या वर्तमान में 33 से बढ़कर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) हो जायेगी।
कानून के विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों को और तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2025 को उच्चतम न्यायालय में 81,394 लंबित मामले थे। उच्चतम न्यायालय के 1950 में गठन के समय मुख्य न्यायाधीश सहित केवल आठ न्यायाधीश थे।
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Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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