उम्र और अटेम्पट... NEET-UG परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी; पेपर लीक पर NTA का बड़ा दावा
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने नीट-यूजी परीक्षा में बड़े सुधारों की योजना बनाई है। अब परीक्षा में उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा तय करने और प्रयासों की संख्या पर अंकुश लगाने का फैसला लिया गया है।

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ( NTA) ने नीट-यूजी परीक्षा में बड़े सुधारों की योजना बनाई है। अब परीक्षा में उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा तय करने और प्रयासों की संख्या पर अंकुश लगाने का फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसदीय समिति को सूचित किया कि पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर ये बदलाव लागू किए जाएंगे।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एनटीए ने अपनी प्रस्तुति देते हुए तीन प्रमुख दीर्घकालिक सुधारों की जानकारी दी। इनमें शामिल हैं…
- पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में पूर्ण बदलाव
- बहु-सत्रीय और बहु-चरणीय परीक्षा प्रणाली की शुरुआत
- उम्मीदवारों के प्रयासों की संख्या तथा ऊपरी आयु सीमा तय करना
बता दें कि समिति में फिलहाल 28 सांसद हैं, जिनमें भाजपा के 17, कांग्रेस के 4, सपा के 3, तृणमूल कांग्रेस के 2, डीएमके का 1 और एनसीपी (एसपी) का 1 सदस्य शामिल है।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें दो चरणों में लागू
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। चरण-1 पहले ही शुरू हो चुका है, जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, फेशियल ऑथेंटिकेशन, मोबाइल जैमर, सीसीटीवी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी जैसी कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं।
चरण-2 में क्लाउड आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लॉकचेन सुरक्षा तथा इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं के बीच सामंजस्य स्थापित किया जाएगा। बता दें कि वर्तमान में नीट-यूजी परीक्षा एक ही शिफ्ट में पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित होती है। न्यूनतम आयु 17 वर्ष है, लेकिन ऊपरी आयु सीमा या अटेम्पट की कोई पाबंदी नहीं है।
परीक्षा रद्द होने का मामला
यह जानकारी उस समय सामने आई है जब एनटीए ने 12 मई को नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर दी थी। 3 मई को हुई परीक्षा के प्रश्नपत्र से कम से कम 120 प्रश्न एक ‘अनुमानित प्रश्नपत्र’ में मिलने की शिकायत आई थी, जिससे 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए। अब परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी।
'लीक नहीं, अनियमितताएं थीं'
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बैठक में एनटीए ने साफ किया कि यह पेपर लीक का मामला नहीं था, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं और कदाचार सामने आए थे। वहीं, भाजपा सांसदों ने 'पेपर लीक' शब्द का इस्तेमाल किए जाने का विरोध किया और एजेंडा दस्तावेज से इसे हटाने की मांग की। एनटीए ने समिति को बताया कि 3 मई को परीक्षा हुई, 7 मई को कदाचार की सूचना मिली, 8 मई को केंद्रीय एजेंसियों को सत्यापन के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर 12 मई को परीक्षा रद्द कर सीबीआई को सौंप दिया गया।
अब तक कितने गिरफ्तार?
इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें लातूर के कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, पुणे के सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और वनस्पति विज्ञान शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे शामिल हैं। दोनों शिक्षक एनटीए के नीट-यूजी विशेषज्ञ पैनल के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
उत्तर प्रदेश की यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के कुलपति डॉ अजय सिंह ने आयु और प्रयास सीमा लगाए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक उम्र के बाद नई चीजें सीखने की क्षमता कम हो जाती है। कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी सीमाएं पहले से मौजूद हैं। वहीं, लखनऊ के नीट कोचिंग शिक्षक प्रितेश मौर्य ने सुझाव दिया कि नई सीमाएं तुरंत नहीं लगाई जाएं। छात्रों को तैयारी के लिए कम से कम दो-तीन साल का समय दिया जाए। उन्होंने चिंता जताई कि ग्रामीण और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
क्या है भविष्य की योजना?
बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 15 मई को घोषणा की कि अगले वर्ष से नीट-यूजी पूरी तरह कंप्यूटर आधारित मोड में होगी। फिलहाल एनटीए एक शिफ्ट में 1.5 लाख छात्रों की परीक्षा ले सकता है, जिसे एक साल में 10 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य है। 2018 में स्थापना के बाद एनटीए अब तक 270 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कर चुका है, जिनमें 6.6 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए हैं।
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लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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