
अब बीज विधेयक पर कन्फ्यूजन? किसानों के पारंपरिक बीजों पर लागू होगा या नहीं; क्या बोली सरकार
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने संसद को बताया कि नए बीज विधेयक से किसानों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे बल्कि वे सुरक्षित रहेंगे और इसके जरिए किसान परंपरागत बीजों का रख-रखाव और संरक्षण कर सकेंगे।
केंद्र सरकार बीज विधेयक लाने पर विचार कर रही है। इस बावत कई तरह के कन्फ्यूजन सामने आने लगे हैं। इसी बीच केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज (मंगलवार, 16 दिसंबर को) लोकसभा को बताया कि प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय बीज विधेयक-2025’ किसानों और उनकी पारंपरिक बीज किस्मों पर लागू नहीं होगा। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो किसानों के अपने खेत में बचाए गए बीजों को सुरक्षित रखने, उनका आदान-प्रदान करने और उन्हें बेचने के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
रामनाथ ठाकुर ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप किसान संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने के बाद इस कानून का मसौदा तैयार किया है। ठाकुर ने कहा, ‘‘विधेयक के प्रावधान किसानों और इनके द्वारा विकसित किस्मों पर लागू नहीं होते हैं, जिनमें पारंपरिक किस्में भी शामिल हैं। यह विधेयक पादप किस्मों के संरक्षण और किसान अधिकार अधिनियम, 2001 के अनुरूप किसानों के अधिकारों की रक्षा करता है, जिसके तहत उन्हें संरक्षित बीजों को उगाने, बोने, सहेजने, आदान-प्रदान करने और बेचने का अधिकार है।’’
पौध नर्सरियों के पंजीकरण के प्रावधान
उन्होंने कहा कि जैव विविधता अधिनियम, 2002 और पादप किस्मों के संरक्षण और किसान अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत विभिन्न प्रावधान किसानों, सामुदायिक बीज उत्पादकों और पारंपरिक एवं स्वदेशी बीज किस्मों की सुरक्षा के लिए भी उपलब्ध हैं। मंत्री ने कहा कि विधेयक में बाजार में बेची जाने वाली सभी किस्मों के अनिवार्य पंजीकरण, बीज उत्पादकों, बीज प्रसंस्करण इकाइयों और विक्रेताओं के पंजीकरण तथा पौध नर्सरियों के पंजीकरण के प्रावधान हैं।
ठाकुर ने कहा कि बीज विधेयक 2025 का मसौदा वर्तमान में पूर्व-विधायी परामर्श चरण में है और इसे किसान संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक किया गया है।

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Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




