ये तो भारत के लिए भी अच्छा नहीं है, ईरान ने यूएई का नाम लेकर क्यों कही ऐसी बात?

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ब्रिक्स सम्मेलन से पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने दिल्ली में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने UAE पर ब्रिक्स में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए नए 'पेमेंट फ्रेमवर्क' का ऐलान किया।

ये तो भारत के लिए भी अच्छा नहीं है, ईरान ने यूएई का नाम लेकर क्यों कही ऐसी बात?

ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी इस समय भारत के दौरे पर हैं। नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों के अहम सम्मेलन से ठीक पहले उन्होंने पश्चिम एशिया के तनाव, भारत की भूमिका और वैश्विक व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की है। काजिम गरीबाबादी ने स्पष्ट रूप से कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रिक्स समूह के अंदर पश्चिम एशिया विवाद पर एक 'आम सहमति' बनने में बाधा डाल रहा है। ब्रिक्स का एक सदस्य देश (UAE) लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान की निंदा की जाए।

इसके जवाब में ईरान का कहना है कि उसने कभी अपने किसी पड़ोसी देश पर हमला नहीं किया। उलटे, इन अरब देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल करने दिए हैं। ईरान का मानना है कि ब्रिक्स के अंदर ऐसी फूट दुनिया में गलत संदेश देगी, जो कि भारत की अध्यक्षता के लिए भी अच्छा नहीं है। नई दिल्ली में मौजूद गरीबाबादी ने चुनिंदा पत्रकारों के एक समूह से कहा कि ब्रिक्स के 'एक सदस्य देश' द्वारा ईरान की निंदा करने की मांग ने समूह को एकमत स्थिति तक पहुंचने से रोक दिया है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता सफल हो। दुनिया को यह संदेश देना अच्छा दृष्टिकोण नहीं है कि ब्रिक्स विभाजित है। एक देश ईरान की निंदा करने पर जोर दे रहा है।'

भारत से शांति की उम्मीद और तारीफ

ईरान ने ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका की जमकर तारीफ की और उसे निष्पक्ष बताया। ईरान का कहना है कि भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए भारत जो भी पहल या मध्यस्थता करेगा, ईरान उसका खुले दिल से स्वागत करेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और नया 'टोल सिस्टम'

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्र का वह संकरा और अहम रास्ता है जहां से दुनिया का 20% तेल और गैस (LNG) गुजरता है। ईरान द्वारा इसे रोके जाने से दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसे लेकर ईरान ने कुछ अहम बातें बताईं।

नया रास्ता: ईरान और ओमान मिलकर इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए एक नया 'सर्विस और पेमेंट' सिस्टम बना रहे हैं। इसके तहत जहाजों के आकार और सामान के वजन के हिसाब से फीस (टोल) ली जाएगी और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।

भारतीय जहाजों को छूट: ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दे दी है और जल्द ही कुछ और जहाजों को घर लौटने की इजाजत मिल सकती है।

पूरी तरह कब खुलेगा रास्ता? ईरान की शर्त है कि अगर अमेरिका उसके बंदरगाहों से नाकाबंदी हटा ले, युद्ध खत्म कर दे और ईरान का फ्रीज किया हुआ पैसा लौटा दे, तो वह यह रास्ता पूरी तरह खोल देगा।

ईरान को डर है कि अगर उसने अभी बिना शर्त रास्ता खोल दिया, तो अमेरिका और उसके सहयोगी इसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।

चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान और अमेरिका पर रुख

चाबहार पोर्ट: ईरान ने कहा कि वह भारत के साथ चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अब यह भारत को तय करना है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच इस प्रोजेक्ट को कैसे आगे बढ़ाता है।

पाकिस्तान की भूमिका: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर ईरान ने कहा कि पाकिस्तान सिर्फ एक 'सुविधाप्रदाता' है और ईरान कूटनीतिक बातचीत के ऐसे किसी भी प्रयास का स्वागत करता है।

अमेरिका पर तंज: ईरान के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका को भारी रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है और वह बातचीत से युद्ध खत्म करने के मूड में नहीं है।

ब्रिक्स सम्मेलन की अहमियत

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं। इसमें ईरान और रूस के विदेश मंत्री भी शामिल हो रहे हैं।

ब्रिक्स की ताकत: ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने की थी। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE इसमें जुड़े, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बन गया है।

आज यह 11 देशों का समूह दुनिया की 49.5% आबादी, 40% जीडीपी (GDP) और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे बेहद ताकतवर बनाता है।

कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि ईरान पश्चिम एशिया के तनाव का ठीकरा अमेरिका और कुछ अरब देशों (जैसे UAE) पर फोड़ रहा है। साथ ही, वह कूटनीतिक और व्यापारिक समाधान के लिए भारत की ओर एक अहम और भरोसेमंद साथी के रूप में देख रहा है।

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