सिंधु जल समझौते को लेकर छटपटाता रह जाएगा पाकिस्तान, नहीं मिलेगा एक बूंद भी पानी; भारत ने किया साफ
भारत ने पिछले साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था। भारत ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रोता नजर आया है।

भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को लेकर चाहे कितना भी छटपटा ले, उसे पानी की एक बूंद नहीं मिलेगी। भारत सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि सिंधु जल समझौता अब भी स्थगित स्थिति में है और आने वाले दिनों में यह सुनिश्चित कर लिया जाएगा कि पाकिस्तान तक एक बूंद पानी न पहुंचे।
ये बातें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कही हैं। इस मुद्दे को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पानी को भारत डायवर्ट करने की योजना की निगरानी गृह मंत्री अमित शाह खुद कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने एनएनआई से बात करते हुए यह भी पुष्टि की कि 1960 से चला आ रहा सिंधु जल समझौता अब पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
पाटिल ने कहा, “यह समझौता अभी स्थगित है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है, तब से हमारी सरकार हर संभव कोशिश कर रही है कि सिंधु से एक भी बूंद पानी बहकर पाकिस्तान ना जाए। इस पूरे मामले की खुद गृह मंत्री अमित शाह व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि हमारा काम निश्चित समय सीमा पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले सालों में पाकिस्तान को भारत से एक बूंद पानी भी नसीब नहीं होगा।”
भारत ने स्थगित किया था समझौता
बता दें कि भारत ने बीते साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था। भारत ने साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। तब से पाकिस्तान बार बार रोता नजर आया है। पाकिस्तान ने वैश्विक मंचों पर भी इस मुद्दे पर उठाया है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता तब तक स्थगित रहेगा जब तक पाकिस्तान आतंक को शह देता रहेगा। अब पाकिस्तान को एक बार फिर मैसेज मिल गया है।
क्या है भारत का प्लान?
इससे पहले 1960 में हुए सिंधु जल संधि के तहत 3 पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को मिला था। वहीं 3 पूर्वी नदियों, रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के हिस्से में आया था। हालांकि भारत को इन तीन पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल करने का अधिकार था। अब भारत सरकार ने चेनाब नदी के पानी को डायवर्ट करने की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट के तहत चेनाब के लगभग 1.9 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी को टनल के जरिए ब्यास में डाइवर्ट कर दिया जाएगा। गौरतलब चेनाब नदी का पानी पाकिस्तान में खेती के लिए लाइफलाइन है। भारत अगर इसका पानी ब्यास नदी की तरफ मोड़ता है, तो पहले से सूखे का मार झेल रहा पाक का पंजाब प्रांत अकाली के दलदल में फंस सकता है।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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