माइक हटाने का कोई आदेश नहीं... लाउडस्पीकर पर नखोदा मस्जिद के इमाम का CM शुभेंदु को जवाब
पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार में लाउडस्पीकर विवाद तेज होते जा रहा है। नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने रविवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का कोई आदेश नहीं आया है।

पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार में लाउडस्पीकर विवाद तेज होते जा रहा है। नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने रविवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का कोई आदेश नहीं आया है। इमाम कासमी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के किसी भी आदेश के बावजूद पुलिस अधिकारी माइक हटाने की बात कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में 75-80 dB, व्यावसायिक क्षेत्रों में 70-75 dB, आवासीय क्षेत्रों में 65-70 dB और साइलेंस जोन में 40-45 dB तक ध्वनि सीमा निर्धारित है।
इस दौरान मौलाना कासमी ने जोर देकर कहा कि ये नियम भाजपा सरकार ने नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बनाए हैं। कानून के अनुसार माइक हटाने का कोई आदेश नहीं है। हम कानून का पालन करेंगे, लेकिन पुलिस को भी कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। उनका यह यह बयान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा जिला और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के तुरंत बाद आया है। दरअसल, बैठक में सीएम शुभेंदु ने पूरे राज्य में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित करने और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण सड़क जाम रोकने के सख्त निर्देश दिए थे।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदानी ने आरोप लगाया कि मुसलमानों को 'दूसरे दर्जे का नागरिक' बनाने की 'धमकी की राजनीति' और इस्लामी प्रतीकों पर व्यवस्थित हमले का समन्वित प्रयास चल रहा है। मदानी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बयान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अधिकारी का यह कहना कि वे 'केवल हिंदुओं के लिए काम करेंगे' संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। हर मुख्यमंत्री सभी नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की शपथ लेता है।
उन्होंने समान नागरिक संहिता, स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य करने, मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई और मतदाता सत्यापन जैसे कदमों को 'देश को वैचारिक राज्य' बनाने का सुनियोजित प्रयास बताया। मदानी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इन मुद्दों पर कानूनी और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
मदानी का यह बयान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 18 मई से 'वंदे मातरम' गायन अनिवार्य करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आई हैं। नंदीग्राम से जीत के बाद अधिकारी ने कहा था कि नंदीग्राम के हिंदू लोगों ने मुझे जिताया है, मैं उनके लिए काम करूंगा। गौरतलब है कि भाजपा ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों वाली विधानसभा में 206 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 34 साल लंबे शासन का अंत किया है।
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लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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