
भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ का कोई मामला नहीं, सबसे अधिक कहां हो रही सरकार ने संसद में बताया
नित्यानंद राय ने बताया कि 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर 9.214 किलोमीटर बाड़ का कार्य पूरा है। उन्होंने बताया, ‘2014 से अब तक दर्ज घुसपैठ के प्रयासों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सबसे अधिक 7,528 मामले सामने आए हैं।’
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर मंगलवार को लोकसभा में अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ का मामला रिपोर्ट नहीं किया गया है। नित्यानंद राय ने बताया, ‘2014 से अब तक दर्ज घुसपैठ के प्रयासों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सबसे अधिक 7,528 मामले सामने आए हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर 425, भारत-म्यांमार सीमा पर 298 और भारत-नेपाल व भूटान सीमा पर 157 मामले दर्ज हुए हैं। भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ का मामला रिपोर्ट नहीं किया गया है।’
गृह राज्य मंत्री ने लोकसभा में लिखित में आंकड़ों की जानकारी साझा करते हुए बताया, ‘भारत-पाकिस्तान इंटरनेशनल बॉर्डर की कुल लंबाई 2,289.66 किलोमीटर है, जिसमें से 2,135.136 किलोमीटर यानी 93.25 प्रतिशत भाग पर बाड़ लगाई जा चुकी है। 154.524 किलोमीटर यानी 6.75 प्रतिशत भाग अभी बिना बाड़ का है।’ नित्यानंद राय ने बताया कि भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई 4,096.70 किलोमीटर है, जिसमें से 3,239.92 किलोमीटर (79.08%) पर बाड़ पूरी हो चुकी है। 856.778 किलोमीटर यानी 20.92% पर यह काम बाकी है। उन्होंने बताया, ‘1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर अब तक 9.214 किलोमीटर बाड़ का कार्य पूरा किया गया है।’
विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ
वहीं, राज्यसभा में विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और वीरता की सराहना की गई। यह कहा गया कि इसी विजय के कारण क्षेत्र का भू-राजनीतिक परिदृश्य परिवर्तित हो गया था। उच्च सदन की बैठक शुरू होते ही सभापति सीपी राधाकृष्ण ने 16 दिसंबर 1971 के दिन भारतीय सशस्त्र बलों को पाकिस्तानी सेना पर मिली विजय का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी विजय के कारण बांग्लादेश का निर्माण संभव हो पाया और इसने इस क्षेत्र का भू-राजनीतिक परिदृश्य परिवर्तित कर दिया। इस विजय ने न्याय, मानव गरिमा व स्वतंत्रता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से साबित किया। उन्होंने इस विजय के लिए भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और गरिमा की प्रशंसा की।
सदन में उपस्थित सदस्यों ने मेजें थपथपा कर भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। विजय दिवस हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है। यह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है, जिसका समापन पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण के साथ हुआ था। जनरल एए खान नियाजी के नेतृत्व में लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डाल दिए थे। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े आत्मसमर्पण में से एक था।





