संयुक्त सचिव और उससे उच्च पदों पर कितने SC/ST? संसद में सरकार ने खड़े किए हाथ, बोली - डेटा नहीं

Mar 11, 2026 09:51 pm ISTPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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लोकसभा में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा कि आरक्षण नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए Department of Personnel and Training (DoPT) ने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश जारी किए हैं।

संयुक्त सचिव और उससे उच्च पदों पर कितने SC/ST? संसद में सरकार ने खड़े किए हाथ, बोली - डेटा नहीं

केंद्र ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि सरकार में संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के पदों पर तैनात अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के कम प्रतिनिधित्व से संबंधित कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकारी नीति के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 'ग्रुप ए' के सबसे निचले स्तर तक पदोन्नति में क्रमशः 15 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।

यह प्रश्न पूछा गया था कि क्या संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के पदों पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व कम है? इस प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा, ''इस संबंध में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।'' सिंह ने बताया कि आरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सभी मंत्रालयों/विभागों और उनके अधीन संगठनों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से संबंधित मामलों के लिए कम से कम अवर सचिव रैंक के एक अधिकारी को संपर्क अधिकारी के रूप में नामित करें।

कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं

मंत्री ने कहा, "मिनिस्ट्री/डिपार्टमेंट को लायज़न ऑफिसर के सीधे कंट्रोल में एक रिज़र्वेशन सेल भी बनाना होगा ताकि उसे अपने काम को अच्छे से करने में मदद मिल सके। मिनिस्ट्री/डिपार्टमेंट को DPCs काफी पहले बुलाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं ताकि खाली जगहों को समय पर भरा जा सके।" उन्होंने आगे कहा कि मिनिस्ट्री/डिपार्टमेंट के पास मौजूद डेटा के मुताबिक, 1 जनवरी, 2025 तक SC और ST का कुल प्रतिनिधित्व क्रम से 15 फीसदी और 7.5 फीसदी से ज़्यादा है। हालांकि संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पदों पर उनकी वास्तविक भागीदारी कितनी है, इसका अलग से कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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