ओम बिरला के खिलाफ नोटिस में मिलीं कमियां, अब कब होगी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा
विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा। साथ ही बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन चलाने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खबर है कि विपक्ष की तरफ से दिए गए नोटिस में गलतियां मिली हैं, जिन्हें सुधारने के बाद दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं। सरकार के आरोप हैं कि कांग्रेस सांसदों ने बिरला के साथ बदसलूकी की है।
बिरला ने ही सांसदों के नोटिस में कमियां मिलने के बाद सचिवालय को सुधार कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। पीटीआई भाषा के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि नोटिस में कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए चार जगहों पर वर्ष 2026 के बजाय 2025 लिखा गया था और इस आधार पर नोटिस को खारिज भी किया जा सकता था।
विपक्ष के क्या आरोप
विपक्ष ने बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा। साथ ही बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन चलाने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। इधर, स्पीकर ने प्रस्ताव पर कार्यवाही पूरा नहीं होने तक पद पर बैठने से इनकार कर दिया है।
अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर कम से कम दो लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। नोटिस पर कितने भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन कम से कम दो सदस्यों का हस्ताक्षर अनिवार्य है। सदन द्वारा साधारण बहुमत से पारित प्रस्ताव के माध्यम से अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 94 सी में इसके लिए प्रावधान हैं। अनुच्छेद 96 अध्यक्ष को सदन में अपना बचाव करने का अवसर प्रदान करता है।
नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
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