
NMC का बड़ा फैसला; श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द, छात्रों का क्या होगा?
जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति नेशनल मेडिकल कमीशन ने तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है। यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद लिया गया।
जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है। यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद लिया गया। कॉलेज में शिक्षण संकाय, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में न्यूनतम मानकों का पालन न होने के कारण मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने यह सख्त कदम उठाया। हालांकि, 2025-26 सत्र में प्रवेश ले चुके छात्रों की सीटें सुरक्षित रहेंगी। उन्हें जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त (सुपरन्यूमरेरी) सीटों पर स्थानांतरित किया जाएगा। NMC का यह फैसला तत्काल लागू हो गया है।
बता दें कि संस्थान ने 5 दिसंबर 2024 और 19 दिसंबर 2024 को जारी NMC की सार्वजनिक सूचनाओं के तहत 2025-26 सत्र के लिए 50 MBBS सीटों वाले नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवेदन किया था। आवेदन पर विचार के बाद MARB ने 8 सितंबर 2025 को MBBS कोर्स शुरू करने की अनुमति दी थी। यह अनुमति कई शर्तों के अधीन थी, जैसे मानकों का पालन, अचानक निरीक्षण की अनुमति, सही जानकारी देना और कमियों को दूर करना। MARB ने गलत जानकारी, नियमों का उल्लंघन या मानकों में विफलता पर अनुमति रद्द करने का अधिकार रखा था। अनुमति मिलने के बाद कॉलेज में बुनियादी ढांचे की कमी, क्लिनिकल सामग्री की अपर्याप्तता, योग्य फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी आदि की शिकायतें मिलीं।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 की धारा 28(7) के तहत अचानक निरीक्षण का अधिकार प्रयोग करते हुए 2 जनवरी 2026 को निरीक्षण हुआ। रिपोर्ट में गंभीर कमियां पाई गईं, जैसे शिक्षण फैकल्टी में 39% कमी, ट्यूटर/डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट में 65% कमी। मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी मानकों से बहुत कम थीं। OPD में अपेक्षित 400 की जगह केवल 182 मरीज, बेड ऑक्यूपेंसी 80% की जगह 45%, ICU में 50% बेड भरे, प्रसव प्रति माह केवल 25 (जिसे MARB ने गंभीर रूप से अपर्याप्त बताया)। कुछ विभागों में प्रैक्टिकल लैब और रिसर्च लैब नहीं थीं।
इतना ही नहीं, लेक्चर थिएटर मानकों पर खरे नहीं उतरे, लाइब्रेरी में अपेक्षित 1500 किताबों की जगह केवल 744 और 15 जर्नल्स की जगह केवल 2। ART सेंटर और MDR-TB सुविधाओं की कमी, अलग वार्डों का अभाव, केवल 2 कार्यरत ऑपरेशन थिएटर (अपेक्षित 5), OPD में छोटा OT नहीं, पैरा-क्लिनिकल उपकरण अपर्याप्त। MARB ने 'चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग विनियम 2023' के तहत गैर-अनुपालन को दंडनीय माना। निरीक्षण के बाद संस्थान को UGMSR-2023 के न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं उतरने का निष्कर्ष निकाला गया। इसलिए NMC अध्यक्ष की मंजूरी से अनुमति वापस ली गई और कॉलेज की बैंक गारंटी जब्त करने का फैसला लिया गया।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
और पढ़ें




