
मैं दिल्ली में 2 दिन रहता हूं और गले में संक्रमण हो जाता है, प्रदूषण पर क्या बोले नितिन गडकरी
नितिन गडकरी ने देश की जीवाश्म ईंधन पर भारी निर्भरता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत सालाना लगभग 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन आयात पर खर्च करता है। भाजपा नेता ने कहा, ‘यह कैसा राष्ट्रवाद है? जीवाश्म ईंधन सीमित हैं।’
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को स्वीकार किया कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर प्रदूषण में अहम योगदान देता है। उन्होंने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। गडकरी ने कहा, 'अगर आज कोई सच्चा राष्ट्रवाद है, तो वह आयात कम करना और निर्यात बढ़ाना है। लेकिन हमारी स्थिति देखिए। मैं दिल्ली में दो दिन रहता हूं और गले में संक्रमण हो जाता है। दिल्ली प्रदूषण से परेशान है। मैं सड़क परिवहन मंत्री हूं और हमारे क्षेत्र से लगभग 40 प्रतिशत प्रदूषण जुड़ा हुआ है।'
नितिन गडकरी ने देश की जीवाश्म ईंधन पर भारी निर्भरता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत सालाना लगभग 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन आयात पर खर्च करता है। भाजपा नेता ने कहा, 'यह कैसा राष्ट्रवाद है? जीवाश्म ईंधन सीमित हैं और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। क्या हम जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम नहीं कर सकते? हम इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन संचालित वाहनों को बढ़ावा क्यों नहीं दे सकते, जो शून्य प्रदूषण का कारण बन सकते हैं?'
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट
केंद्रीय मंत्री गडकरी की ये टिप्पणियां तब आईं जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट हुई है। मंगलवार सुबह करीब 8 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर 413 पर दर्ज किया गया, जिससे दृश्यता और जन स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई। प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट में आनंद विहार (AQI 466), अशोक विहार (444) और चांदनी चौक (425) शामिल थे। इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और राष्ट्रपति भवन के आसपास के क्षेत्र भी जहरीले धुंध से ढके हुए थे, जहां AQI 384 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब श्रेणी में आता है।





