
नेहरू-गांधी परिवार पर निशिकांत दुबे के बयान से छिड़ा बवाल, प्रियंका भड़कीं- बंद नहीं हुआ माइक
निशिकांत दुबे ने नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां किताब पर चर्चा चल रही जो आज तक छपी ही नहीं। मैं उस किताबों के बारे में बताना चाहता हूं जो नेहरू, कांग्रेस परिवार के गद्दारी, मक्कारी, भ्रष्टाचार और अय्याशी से भरी पड़ी है। भाजपा सांसद के इस बयान पर विपक्ष ने जमकर पलटवार किया।
संसद के बजट सत्र में बुधवार को भी दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने भाषण के दौरान लोकसभा में कुछ किताबें भी लहराईं और किताब के हवाले से गांधी-नेहरू परिवार को लेकर बयान दिया, जिससे विपक्ष आगबबूला हो गया है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने दुबे के खिलाफ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिकायत की है। प्रियंका गांधी ने भी दुबे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने किताबें दिखाईं, लेकिन उनका माइक बंद नहीं किया गया, जबकि राहुल गांधी को किताब से कोट नहीं करने दिया गया था।
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ''यहां किताब पर चर्चा चल रही जो आज तक छपी ही नहीं। मैं उस किताबों के बारे में बताना चाहता हूं जो नेहरू, कांग्रेस परिवार के गद्दारी, मक्कारी, भ्रष्टाचार और अय्याशी से भरी पड़ी है। और ये छपी हुई किताब है। पहली किताब एडविना और नेहरू है। भारत जब स्वतंत्र हुआ, तब किस तरह से पाकिस्तान का बंटवारा हुआ और किस तरह से पहले पीएम अय्याशी कर रहे थे, इस किताब में लिखा है, उसका जिक्र करना चाहता हूं।'' उन्होंने आगे कहा, ''दूसरी किताब मथई जो नेहरू के पीए थे वह कह रहे कि इंदिरा गांधी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध थे। मैं उन किताबों का जिक्र कर रहा हूं।'' इसके अलावा, दुबे ने सोनिया गांधी पर लिखी किताबों को भी दिखाते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। हालांकि, इस बीच, स्पीकर उन्हें रोकते रहे, लेकिन निशिकांत दुबे बोलते रहे।
नहीं माने निशिकांत दुबे, दिखाते रहे किताब
पीठासीन सभापति तेन्नेटी ने किसी पुस्तक या पत्र का उल्लेख नहीं करने संबंधी नियम का हवाला देते हुए अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देश का उल्लेख किया और दुबे को सदन में किताबें नहीं दिखाने को कहा। हालांकि अपने साथ कुछ किताबें लेकर आए भाजपा सांसद उन्हें दिखाते हुए उनके लेखकों और उनमें लिखी सामग्री के बारे में टिप्पणी करते रहे। दुबे के बयानों के खिलाफ विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया और कुछ सदस्यों को आसन के सामने कागज उछालते हुए भी देखा गया। हंगामा बढ़ने पर पीठासीन सभापति ने कार्यवाही शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी।
निशिकांत दुबे पर प्रियंका गांधी भड़कीं
इस पर प्रियंका ने निशिकांत दुबे पर पलटवार किया। प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''जब मोदी सरकार सदन को बाधित करना चाहती है, तो निशिकांत दुबे को बोलने के लिए खड़ा कर देती है। जहां, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी को संसद में, एक पब्लिश हो चुकी किताब से कुछ उद्धृत नहीं करने दिया गया, वहीं निशिकांत दुबे 6 किताबें लिए हुए हैं, सामने से दिखा रहे हैं, उनमें से उद्धृत कर रहे हैं, लेकिन उनका माइक बंद नहीं किया जा रहा है।''
'देश का ध्यान भटकाया जा रहा'
उन्होंने दावा किया, ''मोदी सरकार दिखाना चाहती है कि संसद में सिर्फ उन्हीं की चलती है। यह लोकसभा अध्यक्ष पद, संसद, लोकतंत्र और देश की जनता का निरादर है।'' प्रियंका ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष कोई एक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वह पूरे विपक्ष के प्रतिनिधि हैं, जिसका मतलब यह है कि सरकार उन करोड़ों लोगों का मुंह बंद करना चाहती है, जिन्होंने विपक्ष के सांसदों को वोट दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, ''एक तरफ नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है, वहीं दूसरी तरफ किसी को खड़ा कर तमाम फिजूल की बातें बोलने दी जाती हैं। सदन में बार-बार नेहरू जी का नाम लिया जाता है। ये सनक है, जिससे देश का ध्यान भटकाया जा रहा है।'' प्रियंका ने दावा किया, ''मोदी सरकार चाहती है कि लोगों को नरवणे जी की लिखी बातें न पता चलें। जब चीन की सेना हमारी सरहद पर थी, तो सत्ता में बैठे नेता निर्णय ही नहीं ले पा रहे थे कि अब क्या करना है। दो घंटे बाद सरकार यह कहती है कि आप खुद ही निर्णय ले लो और भाजपा के यही लोग इंदिरा गांधी जी और इतिहास की बातें करते हैं।''

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
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