धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव मामले की 9 जज करेंगे सुनवाई, पीठ में कौन-कौन?

Feb 16, 2026 05:43 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहाकि नौ-सदस्यीय संविधान पीठ केरल के शबरिमला मंदिर सहित विभिन्न धर्मों में और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी।

धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव मामले की 9 जज करेंगे सुनवाई, पीठ में कौन-कौन?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहाकि नौ-सदस्यीय संविधान पीठ केरल के शबरिमला मंदिर सहित विभिन्न धर्मों में और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहाकि यह बेंच सात अप्रैल को विभिन्न याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू करेगी। इसके मुताबिक सुनवाई 22 अप्रैल को पूरी होने की संभावना है। बेंच ने संबद्ध पक्षों को 14 मार्च या इससे पहले अपने लिखित अभ्यावेदन दाखिल करने को कहा।

शबरीमाला का भी मामला
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने शबरीमाला से संबंधित उस फैसले पर पुनर्विचार के अनुरोध का समर्थन किया है, जिसमें केरल के इस पवित्र पर्वतीय मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी। शबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करने वाले पक्षों के लिए बेंच ने वकील कृष्ण कुमार सिंह को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया। वहीं, फैसले की समीक्षा का विरोध करने वालों के लिए शाश्वती परी को नोडल अधिवक्ता बनाया गया है। सीजेआई ने कहाकि हम यह उचित समझते हैं कि वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर और शिवम सिंह को ‘न्याय मित्र’ नियुक्त किया जाए। सिंह इस न्यायालय के समक्ष सभी पक्षों के विचार प्रस्तुत करेंगे।

आदेश में कहा गया कि नौ-सदस्यीय पीठ सात अप्रैल, 2026 को सुबह 10:30 बजे शबरीमाला मामले में पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई शुरू करेगी। पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं या उनके समर्थकों के पक्ष को सात अप्रैल से नौ अप्रैल तक सुना जाएगा। पुनर्विचार याचिकाओं का विरोध करने वालों की सुनवाई 14 से 16 अप्रैल तक होगी। यदि कोई प्रतिवाद प्रस्तुत करना हो तो उसकी सुनवाई 21 अप्रैल, 2026 को होगी, जिसके बाद न्याय-मित्र द्वारा अंतिम और निर्णायक अभ्यावेदन दिए जाएंगे। इसके 22 अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। बेंच ने दोनों पक्षों के वकीलों को समय-सीमा का पालन करने का निर्देश दिया।

पहले क्या कहा था
शीर्ष अदालत ने 11 मई, 2020 को कहा था कि शबरीमाला मंदिर प्रवेश मामले में समीक्षा क्षेत्राधिकार के तहत अपनी सीमित शक्ति का प्रयोग करते हुए, उसकी पांच-न्यायाधीशों की पीठ के पास विधि के प्रश्नों को निर्णय के लिए एक बड़ी पीठ को संदर्भित करने की शक्तियां हैं। इससे दो महीने पहले, सुप्रीम कोर्ट ने उन आपत्तियों को खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि 14 नवंबर, 2019 को पांच जजों की पीठ ने 2018 के शबरीमाला फैसले से संबंधित पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला किए बिना मामले को वृहद पीठ के पास भेजकर गलती की थी। इस फैसले में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को केरल के पहाड़ी मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

सात सवाल किए गए थे तैयार
इसमें विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर सात प्रश्न तैयार किए गए थे। यह स्पष्ट किया गया था कि इसमें तैयार किए गए मुद्दों को जोड़ने एवं हटाने की गुंजाइश है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अन्य प्रश्नों के अलावा, वह इस बात की भी पड़ताल करेगी कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या धार्मिक समूह से संबंधित नहीं है, जनहित याचिका दायर करके उस धार्मिक संप्रदाय या धार्मिक समूह की किसी प्रथा पर सवाल उठा सकता है। शबरीमाला मामले के अलावा, फैसले में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों और दरगाहों में प्रवेश तथा गैर-पारसी पुरुषों से विवाहित पारसी महिलाओं को अज्ञारी के पवित्र अग्निस्थल में प्रवेश से प्रतिबंधित किए जाने के मुद्दों को भी वृहद पीठ के समक्ष संदर्भित किया गया था।

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

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