खालिस्तानियों के इशारे पर नाच रहे... भारतीय दूत की कनाडा को दो टूक; मांग लिए निज्जर केस के सबूत

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ओटावा
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कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने निज्जर मर्डर केस में कनाडा सरकार को कोर्ट में सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कनाडाई खुफिया एजेंसी CSIS को खालिस्तानियों के प्रभाव में बताया है।

खालिस्तानियों के इशारे पर नाच रहे... भारतीय दूत की कनाडा को दो टूक; मांग लिए निज्जर केस के सबूत

भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडाई धरती पर अपराधों में भारत सरकार की संलिप्तता के दावों को जोरदार तरीके से खारिज कर दिया है। उन्होंने निज्जर केस से जुड़े आरोपों को "कोरी कल्पना" करार देते हुए कहा कि कनाडा की खुफिया एजेंसी खालिस्तानी अलगाववादियों के प्रभाव में आ चुकी है।

कनाडाई खुफिया एजेंसी पर गंभीर आरोप

मंगलवार को 'द ग्लोब एंड मेल' ने उच्चायुक्त पटनायक का एक कथित इंटरव्यू पब्लिश किया। इसमें पटनायक ने आरोप लगाया कि कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) के कुछ हिस्से कनाडा से काम कर रहे खालिस्तानी अलगाववादी समूहों के प्रभाव में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में कनाडा में भारतीय दूत का पदभार संभालने वाले पटनायक ने कहा कि भारत में यह आम धारणा है कि कनाडा का सुरक्षा तंत्र "समझौतावादी यानी कॉम्प्रोमाइज्ड" हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि खालिस्तानी समूहों ने कनाडा को पंजाब के खिलाफ अलगाववादी गतिविधियों का अड्डा बना लिया है। भारत के खिलाफ गढ़े गए खुफिया नैरेटिव पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं।

'पब्लिक ट्रायल बंद हो, कोर्ट में साबित करें आरोप'

निज्जर हत्याकांड की जांच को सार्वजनिक करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए पटनायक ने कहा कि इस मामले को "तोड़-मरोड़ कर" पेश किया गया है और इसका भारी राजनीतिकरण हुआ है।

उन्होंने मौजूदा कनाडा सरकार को सीधे चुनौती देते हुए कहा, "कोर्ट में जाइए और इसे साबित कीजिए।" पटनायक ने मीडिया और राजनीतिक बयानों के जरिए "पब्लिक ट्रायल" का कड़ा विरोध किया और कहा कि कनाडा ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया है जो भारत सरकार को इस हत्या से जोड़ता हो।

'कुछ सिरफिरे तत्व हो सकते हैं जिम्मेदार'

भारतीय दूत ने इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया कि "कुछ सिरफिरे तत्व" या स्वतंत्र रूप से काम करने वाले व्यक्तियों ने इस घटना को अंजाम दिया हो। उन्होंने पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकास यादव का भी जिक्र किया, जिसे जांचकर्ताओं ने निज्जर केस और अमेरिका में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की साजिश से जोड़ा है।

आतंकवाद विशेषज्ञ राजनयिकों से खालिस्तानियों को डर क्यों?

पटनायक ने कनाडा में आतंकवाद-निरोध (काउंटर टेररिज्म) बैकग्राउंड वाले भारतीय राजनयिकों की नियुक्ति का बचाव किया। इसमें टोरंटो में नियुक्त महावाणिज्य दूत महावीर सिंघवी का नाम भी शामिल है। प्रो-खालिस्तान समूहों की आलोचनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने पूछा, "वे किसी ऐसे व्यक्ति से क्यों डरते हैं जो आतंकवाद से निपटने का विशेषज्ञ रहा हो?" उन्होंने रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की तारीफ करते हुए इसे एक "स्वतंत्र और बहुत अच्छा संगठन" बताया, लेकिन यह भी कहा कि यह संस्था अतीत में "राजनीतिक निर्देशों" के प्रति संवेदनशील रही है।

उच्चायुक्त ने खारिज किया दावा

आर्टिकल पब्लिश होने के बाद भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने इसे खारिज कर दिया। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त एक्स हैंडल से लिखा गया, “आज ‘ग्लोब एंड मेल’ के लेख में लगाए गए आरोपों से मैं निराश हूं। भारत ने कनाडा की कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ, खासकर पिछले एक साल में, बहुत अच्छा सहयोग बनाए रखा है। NSA की यात्रा और सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित बैठकें इस सहयोग का प्रमाण हैं। हमें कनाडा की संस्थाओं पर पूरा भरोसा है और हम इन भ्रामक आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। यह रिपोर्ट, जो एक ‘ऑफ-द-रिकॉर्ड’ बातचीत पर आधारित है, उसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है; इसमें चुनिंदा बातों का इस्तेमाल किया गया है और यह संस्थाओं की निष्ठा के बारे में हमारे मौजूदा आकलन को नहीं दर्शाती है।”

कनाडा सरकार का पलटवार और संबंधों का भविष्य

कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगारी ने भारतीय दूत के दावों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि CSIS के 'कॉम्प्रोमाइज्ड' होने का दावा "झूठा" है और यह कनाडाई सुरक्षाकर्मियों के काम को कमतर आंकता है।

बता दें कि 2023 में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे। विवाद बढ़ने पर 2024 में पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा सहित कई राजनयिकों को निष्कासित किया गया था। निज्जर केस में फिलहाल चार भारतीय नागरिकों पर फर्स्ट-डिग्री मर्डर और साजिश का चार्ज लगा है, जिनका ट्रायल 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

इन तमाम तनावों के बीच, भारत और कनाडा आर्थिक संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश भी कर रहे हैं। व्यापार वार्ताएं फिर से शुरू हो चुकी हैं और दोनों देश 2026 के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। हालांकि, कनाडाई खुफिया रिपोर्टों में अभी भी चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान के साथ भारत को विदेशी हस्तक्षेप करने वाले देशों की सूची में रखा गया है।

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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