निहंग सिखों ने हाईवे पर शुरू किया खालसा राज टैक्स, हिमाचल प्रदेश सरकार का तगड़ा विरोध
सरकार ने निजी कारों और कुछ यात्री वाहनों पर शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है। वर्तमान में कार, जीप और वैन पर 100 रुपये, 6-12 सीट वाले वाहनों पर 130 रुपये, ट्रैक्टर पर 100 रुपये और भारी वाहनों पर 800 रुपये तक शुल्क लिया जाता है।

हिमाचल प्रदेश में लगाए जा रहे एंट्री टैक्स के विरोध तेज हो गया है। खबर है कि निहंग सिख संगठनों ने बुधवार से कुल्लू-मनाली हाईवे पर कीरतपुर साहिब में मोड़ा टोल प्लाजा के निकट हिमाचल प्रदेश से आने वाले वाहनों से खालसा राज टैक्स के नाम पर स्वैच्छिक राशि एकत्रित करनी शुरू कर दी। इसकी अगुवाई निहंग संगठन तरना दल कर रहा है।
तरना दल के निहंग अच्छर सिंह ने कहा कि कार समेत छोटी गाड़ियों से 100 रुपए, छोटे कॉमर्शियल वाहनों से 200 रुपए और बड़ी गाड़ियों से 300 से 500 रुपए की वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी से जोर जबरदस्ती नहीं करेंगे। निहंग ने कहा कि नेशनल हाईवे अथोरिटी आफ इंडिया जो टैक्स लेती है, उसके जरिए रोड बनाकर देती है। उससे हमें कोई नुकसान नहीं है। मगर हिमाचल सरकार गुंडा टैक्स ले रही है। उन्होंने हिमाचल और पंजाब सरकार को चेतावनी दी कि अगर उन्हें रोकने की कोशिश की गई तो अंजाम ठीक नहीं होगा।
वाहन चालक से जोर-जबरदस्ती नहीं, इच्छा से दे सकते हैं दान
निहंग सिंहों ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन चालक पर कोई दबाव या जोर-जबरदस्ती नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिसे यह पहल उचित लगती है वह अपनी श्रद्धा और इच्छा अनुसार राशि दे सकता है, जबकि जो योगदान नहीं देना चाहता उसे भी बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया जा रहा है। यह अभियान हिमाचल प्रदेश सरकार को संदेश देने और एंट्री टैक्स के विरोध को दर्ज कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि जब तक हिमाचल प्रदेश सरकार एंट्री टैक्स समाप्त नहीं करती, तब तक निहंग जत्थेबंदियां अपने स्तर पर विरोध जारी रखेंगी। निहंग सिंहों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को परेशानी देना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना है। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली नीतियों का विरोध किया जाना जरूरी है। इससे व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं और दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पुलिस प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राहुल शर्मा भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
क्या है एंट्री टैक्स विवाद
हिमाचल में एंट्री करने वाले वाहनों से बरसों से एंट्री टैक्स वसूला जाता है। साल वर्ष 2025 में हिमाचल सरकार ने इन टैक्स की दरों में मामूली बढ़ोतरी की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में सरकार ने एक नई टोल नीति जारी करते हुए कई श्रेणियों के वाहनों पर भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया, जिसमें एंट्री टैक्स में भारी इजाफा कर दिया गया था। हिमाचल सरकार के इस फैसले का जबरदस्त विरोध होने लगा। सबसे ज्यादा विरोध पंजाब और हरियाणा में देखने को मिला क्योंकि हिमाचल में ज्यादा टूरिस्ट और ट्रांसपोर्टर्स यहीं से आते-जाते हैं।
विवाद बढ़ने पर 31 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने निजी कारों और कुछ यात्री वाहनों पर प्रस्तावित बढ़ोतरी को वापस लेने की घोषणा की। अभी कार/जीप/वैन के 100 रुपए, 6-12 सीट वाहन के 130 रुपए, ट्रैक्टर के 100 रुपए ओर भारी वाहनों के 800 रुपए तक लिए जा रहे हैं। निहंग सिंहों ने चेतावनी दी है कि यदि हिमाचल प्रदेश सरकार ने जल्द इस मामले में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो उनका विरोध और तेज होगा।
रिपोर्ट: मोनी देवी
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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