तीन दशक पुराने श्रीनगर हिंसा मामले में NIA की हुर्रियत नेताओं पर नकेल, चार्जशीट दायर

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जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत नेताओं पर और तगड़ी नकेल कसते हुए NIA ने एक तीन दशक पुराने मामले में चार्जशीट दायर की है। इस मामले में शब्बीर शाह समेत हुर्रियत के पुराने नेताओं के आरोप तय किए गए हैं। इसमें आरोपी बनाए गए तीन नेताओं की मौत हो चुकी है।

Raids on Jamaat and Hurriyat hideouts in Jammu and Kashmir what was recovered

जम्मू-कश्मीर में आतंक के ताबूत में एक और कील ठोकते हुए NIA ने श्रीनगर हिंसा मामले में 6 हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में बताया गया है कि कैसे इन अलगाववादी नेताओं ने एक आतंकी के जनाजे में शामिल भीड़ को उकसाया और फिर उसमें मौजूद आतंकियों ने पुलिसवालों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गौरलतब है कि इस मामले की जांच शुरुआत से जम्मू-कश्मीर पुलिस कर रही थी। अप्रैल 2026 में गृहमंत्रालय ने इसे एनआईओ को सौंपा था।

शुक्रवार को विशेष अदालत में दायर की गई इस चार्जशीट में जिन नेताओं के नाम हैं। उनमें से तीन ( सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील) की मौत पहले ही हो चुकी है। इसके अलावा शब्बीर अहमद शाह, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी को भी आरोपी बनाया गया है।

1996 में आतंकी के जनाजे में मौजूद भीड़ को हुर्रियत नेताओं ने उकसाया-NIA

यह पूरा मामला 17 जुलाई 1996 को सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गए आतंकी हिलाल अहमद बेग के जनाजे से जुड़ा हुआ है। आतंकी के मारे जाने के बाद हुर्रियत नेताओं ने पूरे कश्मीर में लोगों का आह्वान किया। इसके बाद आतंकी के जनाजे में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। यहीं पर इन हुर्रियत नेताओं ने मिलकर लोगों को भड़काया और भारत विरोधी नारे लगवाए।

भीड़ में शामिल थे हथियारबंद आतंकी- NIA

एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इस जनाजे में कुछ हथियारबंद आतंकवादी भी शामिल थे। इन्होंने भीड़ की आड़ लेकर सुरक्षा में तैनात पुलिसवालों के ऊपर जमकर गोलीबारी की। इसके बाद भीड़ के पथराव की वजह से कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। एनआईए ने भीड़ को उकसाने के लिए इन हुर्रियत नेताओं के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया। अब जांच में सामने आए सबूत के मुताबिक, इन नेताओं के उकसावे में आकर ही भीड़ ने सबसे पहले पाकिस्तान समर्थक नारे लगा और फिर भारत विरोधी नारे लगाते हुए सुरक्षाकर्मियों पर हमला बोल दिया।

गौरलतब है कि यह मामला पिछले काफी समय में जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास था। अप्रैल 2026 में गृहमंत्रालय के निर्देश पर इस मामले के एनआईए को ट्रांसफर किया गया था। शुरुआती सबूतों की जांच करने के बाद एनआईए ने अपनी चार्जशीट में बताया कि यह हिंसा किसी गुस्से का परिणाम नहीं थी। बल्कि एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। इसका मकसद नई दिल्ली सरकार को कश्मीर की घाटी में हुर्रियत की ताकत का अहसास कराना था।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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