तमिलनाडु में नया ट्विस्ट, राहुल के पोस्ट ने बढ़ाई CM स्टालिन की टेंशन; एक तीर से साधे तीन निशाने कैसे?
राहुल गांधी के इस पोस्ट ने अब कांग्रेस के अंदर तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को TVK के साथ गठबंधन करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज (मंगलवार, 13 जनवरी को) तमिलनाडु के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति में नई सियासी चिंगारी भड़का दी है। उनके पोस्ट ने न सिर्फ एक नाज़ुक समय में अभिनेता से नेता बने विजय का साथ दिया है, बल्कि उन अटकलों को भी मजबूत किया है कि कांग्रेस, DMK के साथ अपने करीबी संबंधों के बावजूद, विजय की पार्टी TVK के साथ आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समझ बनाने पर विचार कर सकती है।
दरअसल, राहुल गांधी ने तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म 'जन नायकन' को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म 'जन नायकन' को ‘रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश’ तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘तमिल लोगों की आवाज दबाने’ में कभी कामयाब नहीं होंगे। राहुल का यह बयान तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता के सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाई कोर्ट के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देने के एक दिन बाद आया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिलने के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। राहुल का यह बयान सीधे-सीधे बीजेपी और आरएसएस पर उनके उस आरोप की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें वे कहते रहे हैं कि देश की संस्थाओं पर भाजपा और संघ का राजनीतिक दबाव और दखल बढ़ता जा रहा है।
समय ने बढ़ाया संदेश का असर
दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी का यह बयान पोंगल के दिन आया है, जब वे नीलगिरि के गुडलूर में उत्सव मना रहे थे। वियतनाम से लौटने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। ऐसे में उनके शब्दों में सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि तमिल अस्मिता का संदेश भी साफ झलकता दिखा। बता दें कि 'जन नायकन' को लेकर सेंसर बोर्ड, अदालत और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान ने इसे तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस पहले ही फिल्म निर्माताओं के समर्थन में खड़ी थी। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी यह कह चुके हैं कि फिल्मों को राजनीतिक वजहों से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा
राहुल गांधी के इस पोस्ट ने अब कांग्रेस के अंदर तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को TVK के साथ गठबंधन करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच, कांग्रेस को एक नया राजनीतिक फायदा दे सकती है। पार्टी के अंदर शुरुआती फीडबैक से पता चलता है कि विजय और राहुल गांधी दोनों के नेतृत्व वाले अभियान ज़मीनी स्तर पर लोगों से मज़बूती से जुड़ सकते हैं और राज्य में माहौल बदल सकते हैं।
कांग्रेस के अंदर ही दो मत
हालांकि, कांग्रेस में हर कोई इस विचार से सहमत नहीं है। कई सीनियर नेताओं का मानना है कि पार्टी को DMK के साथ अपने लंबे समय के गठबंधन के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनका कहना है कि इस साझेदारी ने कई सालों से स्थिरता, प्रासंगिकता और राजनीतिक लाभ दिया है। उनके मुताबिक, नई रणनीति के साथ प्रयोग करना, चाहे वह कितना भी रोमांचक लगे, उसमें जोखिम हो सकता है। उनका तर्क है कि कांग्रेस को DMK के साथ मौजूदा गठबंधन से अलग होने के बजाय, मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल करके बेहतर जगह और मौजूदा गठबंधन में मज़बूत भूमिका के लिए बातचीत करनी चाहिए।
एक तीर से तीन शिकार कैसे?
बता दें कि तमिलनाडु में कांग्रेस मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK की सहयोगी है। हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ी है। कांग्रेस 234 सदस्यों वाली विधानसभा में पहले 40 सीटें चाहती थीं लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें देने के ही संकेत दिए हैं। इससे खिन्न पार्टी का एक धड़ा विजय की टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से अनुरोध करता रहा है। दूसरी तरफ, बीजेपी AIADMK की अगुवाई वाले गठबंधन के लिए नई-नई रणनीति बना रहा है।
ऐसी सियासी परिस्थितियों में राहुल गांधी की हालिया पोस्ट एक तीर से तीन निशाने जैसा है। पहला तो उन्होंने विजय को उनकी फिल्म के मुद्दे पर समर्थन देकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की है, दूसरा ऐसा कर उन्होंने सहयोगी DMK पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसके पास विजय एक विकल्प हो सकते हैं और तीसरा राहुल ने भाजपा पर करारा प्रहार किया है, और उसे तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर उसके दक्षिणी विस्तार के मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश की है।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




