
नेपाल के नए नोट पर विवाद, भारत के 3 इलाकों को बताया अपना; इनसाइड स्टोरी से समझिए
पिछले साल अक्टूबर में नेपाल ने इन नोटों की छपाई का ठेका चीनी कंपनी चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन को दिया था। नई नोट का डिजाइन मई 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता में बैठक में मंजूर किया गया।
नेपाल ने लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को दिखाने वाली 100 रुपये की नई करेंसी जारी की है। इसे लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने कहा, 'यह 2020 में नेपाल ने इन क्षेत्रों को अपने नक्शे में शामिल किया। इसके बाद यह उसका अगला कदम है। अब नई 100 रुपये की नोट पर भी यही नक्शा छपा है। फिलहाल नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है और अंतरिम सरकार है। भारत की प्रतिक्रिया बहुत जोरदार या आक्रोशपूर्ण नहीं होनी चाहिए, वरना नेपाल की राजनीतिक पार्टियां इसे राष्ट्रवाद का मुद्दा बना देंगी। खासकर भारत-विरोधी ताकतें इस विवाद से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेंगी।'
पूर्व राजदूत केपी फैबियन ने भी नेपाल से कूटनीतिक संवाद की अपील की। उन्होंने ANI से कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक कदम है। अगर नेपाल को वास्तव में विश्वास है कि भारत का यह क्षेत्र उसका है, तो उसे इस मुद्दे पर भारत से कूटनीतिक बातचीत करनी चाहिए, न कि अपनी करेंसी पर नया नक्शा छापना चाहिए।' गुरुवार को नेपाल राष्ट्रीय बैंक ने नई 100 रुपये की नोट जारी की, जिसमें लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। ये नोट शुक्रवार से चलन में आ गए हैं। बैंक ने सार्वजनिक सूचना में कहा कि नई नोट में सुरक्षा और पहचान के बेहतर तत्व जोड़े गए हैं।
नोटों की छपाई का ठेका चीनी कंपनी को
पिछले साल अक्टूबर में नेपाल ने इन नोटों की छपाई का ठेका चीनी कंपनी चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन को दिया था। नई नोट का डिजाइन मई 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किया गया था। गौरतलब है कि 20 मई 2020 को नेपाल ने संविधान संशोधन कर लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने नक्शे में शामिल किया था। भारत ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और कहा था कि नेपाल ने भारत के हिस्से को अपने नक्शे में दिखाया है।





