नेपाल में बिकता रहेगा भारत का आम? क्या बोली सरकार, लगती रोक तो हिल जाता बाजार

भाषा, नई दिल्ली
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आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी से अब तक भारत ने नेपाल को 2,005 टन आम की 149 खेपों का निर्यात किया है, जबकि जून में अब तक 266 टन आम की 18 खेपें भेजी जा चुकी हैं।

नेपाल में बिकता रहेगा भारत का आम? क्या बोली सरकार, लगती रोक तो हिल जाता बाजार

भारत का आम नेपाल में बिकता रहेगा और नेपाल ने इसके आयत पर कोई रोक नहीं लगाई है। भारत और नेपाल दोनों ने इस खबर की पुष्टि की है। इससे पहले बीते मंगलवार को यह सामने आई थी कि जापान के बाद नेपाल ने भी भारत से आम के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पीछे आमों में कीटनाशक की अधिक मात्रा बताई जा रही थी। खबर सामने आने के बाद पूरे बाजार में हलचल मच गई थी। भारत के किसानों से लेकर नेपाल के व्यापारियों ने इस पर चिंता जताई थी। हालांकि अब भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत से आम के आयात पर नेपाल में रोक लगाए जाने खबरों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक' बताया। सरकार ने कहा कि नेपाल को बिना किसी रुकावट के निर्यात लगातार जारी है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि नेपाल के प्लांट क्वारंटीन और कीटनाशक प्रबंधन केंद्र ने खुद ही 10 जून को यह स्पष्ट किया कि भारतीय आमों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

आयात है जारी

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि नेपाल ने भारतीय आम के आयात पर रोक लगा दी है, जो कि पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।” मंत्रालय ने कहा, "मौजूदा नियमों के तहत पौधों के स्वास्थ्य से जुड़ी शर्तों का पालन करने पर आयात जारी है।" गौरतलब है कि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक भारत ने नेपाल को 2,005 टन आम की 149 खेपों का निर्यात किया है। वहीं जून में अब तक 266 टन आम की 18 खेपें भेजी जा चुकी हैं।

क्यों शुरू हुई ऐसी चर्चा?

दरअसल नेपाल ने हाल ही में आयात को लेकर नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। इसके तहत फलों और दूसरे कृषि उत्पादों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए कुछ खास तरह के उपायों को जरूरी बनाया गया है। सरकार ने कहा है कि भारत के आम सभी मानकों को पूरा कर रहे हैं। हालांकि, भारत ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि नए नियमों को बिना किसी बातचीत के लागू कर दिया गया। भारत इस मामले को डब्ल्यूटीओ के सामने भी रख रहा है।

नेपाल ने क्या कहा?

नेपाल ने भी 10 जून को स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों के आयात पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि आयात के लिए तय किए गए ‘फाइटोसैनिटरी’ यानी पौधे के देखभाल से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होगा। नेपाल सरकार के मुताबिक नेपाल के संबंधित अधिकारी जरूरी शर्तें पूरी होने पर ही भारत के आम को आयात की परमिट दे रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भारतीय आमों पर रोक लगाने की खबर से व्यापारियों के बीच चिंता पैदा हो गई थी। उनके मुताबिक अगर आयात पर रोक लगा दी गई तो इससे बाजार में खलबली आ सकती है। नेपाल के कुछ व्यापारियों का कहना था कि बिना किसी रणनीति के इस तरह आयात रोकने से मुश्किल खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक नेपाल के लोगों की मांगें पूरी करने के लिए भारत से आम का आयात जरूरी है।

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Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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