जिस प्रिंसिपल ने 1600 बच्चों को मौत के मुंह से निकाला, भारत फिर बनाएगा उसका उजड़ा स्कूल

लाइव हिन्दुस्तान, काठमांडू
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नेपाल में बाढ़ से त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल तबाह हो गया, लेकिन प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी की सूझबूझ से सैकड़ों बच्चों की जान बच गई। अब भारत इस स्कूल का पुनर्निर्माण करेगा। जानिए 14 मिनट में कैसे टली बड़ी त्रासदी और क्या है स्कूल का भारत से पुराना रिश्ता।

बाढ़ में बह गया स्कूल, बच गईं 1600 जिंदगियां; अब भारत फिर खड़ा करेगा नेपाल का त्रिभुवन स्कूल
बाढ़ में बह गया स्कूल, बच गईं 1600 जिंदगियां; अब भारत फिर खड़ा करेगा नेपाल का त्रिभुवन स्कूल

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच अपनी सूझबूझ से सैकड़ों बच्चों की जान बचाने वाले प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी की कहानी अब भारत-नेपाल संबंधों की एक नई मिसाल बन गई है। नुवाकोट जिले के बिदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को बाढ़ ने पूरी तरह तबाह कर दिया, लेकिन समय रहते प्रिंसिपल के फैसले ने एक बड़ी मानवीय त्रासदी को टाल दिया। अब भारत ने इस स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद का भरोसा दिया है।

भारत के नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने 1 सितंबर को स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि दवाड़ी की समय पर की गई कार्रवाई ने रासुवा से आई विनाशकारी बाढ़ में स्कूल बहने से कुछ ही समय पहले 1600 से अधिक बच्चों की जान बचाने में मदद की। राजदूत ने दवाड़ी को यह भी बताया कि भारत भविष्य में स्कूल के पुनर्निर्माण में सहयोग करेगा।

भारत के नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात की।

सिर्फ 14 मिनट का समय मिला था

26 अगस्त की सुबह त्रिशूली घाटी में हालात अचानक बिगड़ने लगे थे। स्कूल के अकाउंटेंट को रासुवा से एक फोन आया, जिसमें बाढ़ के तेजी से आगे बढ़ने की चेतावनी दी गई। इसके बाद उन्होंने प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को तुरंत इसकी जानकारी दी।

दवाड़ी ने बिना समय गंवाए कक्षाएं रुकवाने और स्कूल की घंटी बजाकर बच्चों को बाहर निकालने का फैसला किया। उन्हें छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए करीब 14 मिनट ही मिले थे।

रॉयटर्स के मुताबिक, स्कूल में करीब 1,600 छात्र पढ़ते थे और चेतावनी मिलने के वक्त 900 से अधिक छात्र तथा 16 शिक्षक-कर्मचारी परिसर में मौजूद थे। दवाड़ी ने स्कूल आने वाली बसों को भी सुरक्षित स्थान की ओर लौटने के निर्देश दिए। कई अभिभावक मोटरसाइकिल से बच्चों को लेने पहुंचे, जबकि कुछ बच्चे बसों और पैदल ऊंचे स्थानों की ओर भागे।

स्थिति कितनी भयावह थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आखिरी बस के सुरक्षित पुल पार करने के करीब 14 मिनट बाद पानी की तेज धार बिदुर में पहुंच गई। दवाड़ी के अनुसार, जैसे ही बस नए पुल से गुजरी, पुराना पुल भी ढह गया। कुछ ही देर में पूरा स्कूल बाढ़ की चपेट में आ गया और उसकी जगह बाद में नदी का तल नजर आया।

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जिस स्कूल को बचाया नहीं जा सका, उसके बच्चों को बचा लिया

राजेंद्र दवाड़ी खुद भी इसी स्कूल के छात्र रह चुके हैं और बाद में इसके प्रिंसिपल बने। बाढ़ के बाद उन्होंने स्कूल को दोबारा बनाने की मांग की थी, लेकिन इस बार सुरक्षित स्थान पर, ताकि भविष्य में ऐसी आपदा की स्थिति में बच्चों की जान खतरे में न पड़े।

उनकी तत्परता की वजह से स्कूल की इमारत तो नहीं बच सकी, लेकिन वहां मौजूद बच्चों और स्टाफ को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि, इस त्रासदी में स्कूल से जुड़े कम से कम एक कर्मचारी समेत कुछ लोग लापता भी हुए।

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भारत से है स्कूल का करीब सात दशक पुराना रिश्ता

इस स्कूल की कहानी भारत-नेपाल सहयोग से भी जुड़ी हुई है। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के मुताबिक, त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल की स्थापना 1950 के दशक में भारतीय सहायता से हुई थी। इसके डिजाइन से जुड़े भारतीय इंजीनियर का संबंध त्रिशूली जलविद्युत परियोजना के निर्माण से भी रहा था।

यानी जिस स्कूल की शुरुआत दशकों पहले भारत की मदद से हुई थी, उसका नया भवन भी भारत के सहयोग से ही बना था। स्कूल की नई इमारत का निर्माण 2022 में भारत के अनुदान से हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम (HICDP) के तहत कराया गया था।

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अब भारत फिर करेगा स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद

बाढ़ ने 2022 में बने स्कूल के भवन को भी नहीं छोड़ा। ऐसे में भारत की ओर से अब उसके पुनर्निर्माण में मदद का भरोसा दिया गया है। राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रिंसिपल दवाड़ी से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि भारत भविष्य में स्कूल के पुनर्निर्माण में सहयोग करेगा।

इस घोषणा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह स्कूल सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के लंबे समय से चले आ रहे जमीनी सहयोग का उदाहरण है। एक तरफ भारत ने दशकों पहले स्कूल की स्थापना में सहायता की, फिर 2022 में इसके नए भवन के निर्माण में अनुदान दिया और अब प्राकृतिक आपदा में उसके पूरी तरह तबाह हो जाने के बाद दोबारा निर्माण में सहयोग का भरोसा दिया है।

त्रिशूली घाटी की भयावह बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ ने त्रिशूली घाटी समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। रासुवा से शुरू हुई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने रास्तों, पुलों, घरों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं।

Amit Kumar

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