
भारत पर भरोसा करते हैं पड़ोसी, लेकिन जिसने पाक जैसी हरकतें कीं... यूरोप से जयशंकर का साफ संदेश
जयशंकर ने पाकिस्तान को भारत का 'अपवाद' पड़ोसी बताते हुए कहा कि दुनिया में कोई अन्य देश आतंकवाद को इतने खुले तौर पर समर्थन नहीं देता। उन्होंने श्रीलंका, म्यांमार, अफगानिस्तान में संकट के समय भारत की त्वरित मदद की मिसालें दीं।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूरोपीय देश लक्समबर्ग की यात्रा के दौरान पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के लिए संकट के समय सबसे भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। जयशंकर ने कहा कि हर पड़ोसी अलग है, लेकिन पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध एक अपवाद हैं। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में किसी और देश द्वारा अपने पड़ोसी के खिलाफ दशकों तक आतंकवाद को राज्य-समर्थित नीति की तरह अपनाने का उदाहरण मिलना कठिन है।
जो पाकिस्तान जैसी हरकतें करते हैं, उनके साथ... जयशंकर का संदेश साफ
विदेश मंत्री ने कहा- हमारे लिए पाकिस्तान के साथ संबंध एक अपवाद है। आज की दुनिया में मुझे कोई ऐसा देश दिखाइए जो अपने पड़ोसी के खिलाफ पाकिस्तान जैसी नीतियां अपनाता हो। दशकों से पाकिस्तान के बड़े शहरों में खुले तौर पर ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं, जो किसी से छिपे नहीं हैं। वहां देश और सेना आतंकवाद का समर्थन करती है और इसे सामान्य बनाने की कोशिश करती है, जैसे यह उनका अधिकार हो। अब दुनिया में कोई इसे स्वीकार नहीं करता। सभी जानते हैं कि ये लोग राष्ट्र समर्थित आतंकवाद फैला रहे हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है, लेकिन हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। हमें अपनी नीतियां इसी आधार पर बनानी होंगी कि यह खास पड़ोसी ऐसा ही व्यवहार करेगा। जो हमारे साथ सहयोग करना चाहते हैं और सकारात्मक रहते हैं, उनके साथ हम उसी तरह व्यवहार करेंगे। लेकिन जो पाकिस्तान जैसी हरकतें करते हैं, उनके साथ अलग तरीके से निपटना होगा।' जयशंकर ने लक्जमबर्ग में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान ये टिप्पणियां कीं।
पड़ोसियों की मदद में सबसे आगे रहता है भारत
जयशंकर ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की सराहना करते हुए अन्य पड़ोसियों के साथ सहयोग की मिसालें दीं। उन्होंने कहा- हमारे कई पड़ोसी हैं और हर एक अलग है। हाल ही में श्रीलंका में अभूतपूर्व चक्रवात आया जिसने भारी तबाही मचाई। चक्रवात शुरू होते ही उस दोपहर तक हमारे दल वहां पहुंच गए। हम खोज और बचाव कार्यों में गहराई से शामिल हुए, राहत सामग्री पहुंचाई। कुछ दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे भेजा और मैंने बड़ा पुनर्निर्माण पैकेज ऑफर किया। म्यांमार में भयानक भूकंप आया और म्यांमार की स्थिति के कारण बहुत कम देश (मदद के लिए) आगे आए। हम मदद करने वालों में से एक थे। हमने तुरंत सैन्य अस्पताल स्थापित किया, खोज और बचाव दल भेजे। अफगानिस्तान में भी भूकंप आया और हम सबसे पहले पहुंचने वाले देश थे।
विदेश मंत्री ने आगे कहा- जब बड़े संकट आते हैं और देशों के पास उसका सामना करने की क्षमता नहीं होती, तो वे स्वाभाविक रूप से उन देशों की ओर देखते हैं जो मदद कर सकते हैं। हमारे क्षेत्र में अब यह विश्वास बढ़ रहा है कि ऐसे समय में भारत पर भरोसा किया जा सकता है। यह विश्वास कुछ वर्षों के अनुभव से आया है। कोविड महामारी के दौरान हमारे लगभग सभी पड़ोसी देशों को पहली वैक्सीन हमसे मिली।
करीब आ रहे भारत और यूरोपीय संघ
यूरोप के साथ संबंधों पर जयशंकर ने आशावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा- हर देश और क्षेत्र अपने हितों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। मुझे विश्वास है कि सामान्य समझ आज भारत और यूरोपीय संघ को बहुत करीब ला रही है। मैं काफी आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि 2026 में यूरोप के साथ संबंधों में उछाल आएगा। भारत की ओर से यूरोप पर समय, ऊर्जा और ध्यान का अधिक निवेश होगा।
लक्जमबर्ग के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज कोई भी बैठक एआई पर विचारों के आदान-प्रदान के बिना पूरी नहीं होती। उन्होंने कहा- हम लगभग छह सप्ताह में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करने वाले हैं। यूरोप और लक्जमबर्ग का एआई को लेकर अपना दृष्टिकोण है और वे जानना चाहते हैं कि हम इसे कैसे देखते हैं। हम दोनों ही इसे नागरिक-केंद्रित तरीके से देखते हैं। भारत में क्या बदलाव आए हैं, इससे क्या नए अवसर पैदा हुए हैं- यह चर्चा का बड़ा हिस्सा रहा। मुझे उम्मीद है कि इस वर्ष लक्जमबर्ग से बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल आएगा, अधिक मंत्रिस्तरीय यात्राएं होंगी और चर्चाओं को आगे गहरा किया जाएगा।
छह दिवसीय यात्रा पर हैं जयशंकर
इससे पहले फ्रांस और लक्जमबर्ग की छह दिवसीय यात्रा पर आए जयशंकर ने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन के साथ वित्त, निवेश और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर बातचीत की। उन्होंने लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की। बेटेल के साथ अपनी बैठक के शुरुआती संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत लक्जमबर्ग को द्विपक्षीय रूप से और यूरोपीय संघ के भीतर दोनों ही तरह से एक बहुत महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है, और यह यूरोपीय संघ के साथ हमारे अपने संबंधों के विकास के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय है।





