'कॉकरोचों' के लिए 22 दिन अनशन, अब राहुल गांधी के साथ नजर आईं नेहा बोरा
जंतर-मंतर पर 22 दिनों तक अनशन करने वाली नेहा बोरा अब राहुल गांधी के साथ नजर आई हैं। राहुल गांधी कुछ स्टूडेंट्स के साथ प्रेस ब्रीफिंग कर रहे थे। राहुल गांधी के बाद नेहा बोरा ने भी पत्रकारों से बात की।

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के दौरान अगर सोनम वांगचुक के बाद सबसे ज्यादा किसी की चर्चा हो रही थी तो वह हैं जेएनयू में पीएचडी की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा। नेहा बोरा की पहचान ना केवल इतनी लंबी भूख हड़ताल की वजह से बनी है बल्कि उनके जोशीले भाषण भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं। 22 दिन के अनशन के बाद 20 जुलाई को अभिनेत्री शबाना आजमी ने उनका अनशन तोड़वाया था। इसके बाद से वह ज्यादा नजर नहीं आईं। हालांकि अब वह राहुल गांधी के साथ प्रेस ब्रीफिंग में नजर आईं। छात्रों की मांगों और उनपर हुए लाठीचार्ज पर सरकार को घेरने के लिए राहुल गांधी कुछ स्टूडेंट्स के साथ ब्रेस ब्रीफिंग कर रहे थे। नेहा बोला उनके साथ ही पहुंची थीं। राहुल गांधी के बोलने के बाद नेहा बोरा ने भी पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी।
नेहा बोरा को लेकर क्या चल रही है चर्चा?
नेहा बोरा को लेकर लोक सोशल मीडिया पर तरह -तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सरकार के समर्थक उन्हें कांग्रेस का एजेंट बता रहे हैं। वहीं कई लोग नेहा बोरा की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वह जिस तरह से भाषण देती हैं, उससे लोग काफी प्रभावित होते हैं और यह अच्छे नेता के गुण हैं। एक यूजर ने कहा कि नेहा बोरा के पास कांग्रेस में जाने का अच्छा विकल्प है। अगर कन्यैहा कुमार को कांग्रेस अपना सकती है तो नेहा बोरा तो कांग्रेस के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
क्या बोलीं नेहा बोरा
नेहा बोरा ने छात्रों की आवाज उठाने के लिए राहुल गांधी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, इस देश की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा नहीं होती है। जिस तरह से शिक्षा व्यवस्ता को टेकओवर करके युवाओं के सोच को खत्म किया जा रहा है उसपर चर्चा नहीं की जा रही है। बिहार पुलिस ने स्टूडेंट्स को जिस तरह से हिरासत में लिया गया। कई छात्र गायब हैं। वे चाहते थे कि बिहार में शिक्षा दुरुस्त हो। बिहार में भी वही रवैया अपनाया जा रहा है जो दिल्ली में दिखाई देता है। राहुल गांधी जी ने जो मांगें रखी हैं वही छात्रों की मांगें है। धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा होना चाहिए। इससे कोई भी समझौता नहीं होगा। 20 तारीख की कोई जिम्मेदारी नहीं ली गई है। इसमें भी कोई समझौता नहीं होगा। वह प्रधानमंत्री जिनके रहते हुए हमारी शिक्षा व्यवस्था बहने की कगार पर पहुंच गई है। उसे दुरुस्त करने के लिए जब हम आगे आते हैं तो हमारे उपर लाठी चार्ज होता है। उन प्रधानमंत्री को माफी मांगनी होगी। ये सारी मांगें इस देश के छात्रों की हैं।
कौन हैं नेहा बोरा?
नेहा बोरा उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्तानत किया और फिर आंबेडकर विश्वविद्यालय से मास्टर्स की पढ़ाई की। वह जेएनयू में स्कूलऑफ आर्ट्स ऐंड एस्थेटिक्स में रिसर्च कर रही हैं। वह थिएटर से भी जुड़ी रहती हैं। वह AISA की अध्यक्ष हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ ही भूख हड़ताल शुरू की थी। उनके साथ आमीन अमितोज और मनीष कुमार भी भूख हड़ताल कर रहे थे। तीनों छात्रों ने 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म किया था।


