पहले 4 बच्चे बने डॉक्टर, अब 5वें के लिए खरीदा था NEET का पेपर? CBI के हत्थे चढ़ा पूरा परिवार
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर के एक परिवार के 3 सदस्यों समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जानें कैसे व्हाट्सएप पर 'गेस पेपर' और सीकर के एक ईमेल ने खोला इस पूरे फर्जीवाड़े का राज। पढ़ें इनसाइड स्टोरी।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें जयपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) से जांच अपने हाथ में लेने के लिए जयपुर पहुंचने के 24 घंटे के भीतर ही सीबीआई ने यह अहम गिरफ्तारी की है।
गिरफ्तार किए गए 5 आरोपी कौन हैं?
जयपुर का परिवार: दिनेश बीवाल, उनके भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल के बेटे विकास बीवाल। ये तीनों जयपुर जिले के जमवा-रामगढ़ के रहने वाले हैं।
अन्य आरोपी: गुरुग्राम का यश यादव और नासिक का रहने वाला शुभम खैरनार।
बुधवार को एक स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद सीबीआई दिनेश, मांगीलाल, विकास और यश को अपने साथ नई दिल्ली ले गई। जांच में पता चला है कि आरोपी विकास ने पिछले साल भी नीट की परीक्षा दी थी, लेकिन वह फेल हो गया था। इस बार भी उसके परीक्षा पास करने की उम्मीद बेहद कम थी।
कैसे हुई पेपर लीक की यह डील?
सीबीआई से पहले राजस्थान एसओजी इस मामले की जांच कर रही थी। एसओजी को 3 मई की परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो रहे 'गेस पेपर' की भनक लग गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी का ध्यान बीवाल परिवार पर इसलिए केंद्रित है क्योंकि इस परिवार के चार बच्चे 2025 में नीट की परीक्षा पास कर चुके हैं और वर्तमान में अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, दिनेश बीवाल का नाबालिग बेटा सीकर में नीट-यूजी 2026 की तैयारी कर रहा था।
26 से 27 अप्रैल के बीच डील: अधिकारियों को शक है कि दिनेश ने 26 से 27 अप्रैल के बीच यश यादव से यह प्रश्न पत्र हासिल किया था।
29 अप्रैल को सीकर गया दिनेश: जांचकर्ताओं का मानना है कि दिनेश 29 अप्रैल के आसपास सीकर गया और वहां उसने अपने नाबालिग बेटे को यह पेपर सौंपा।
10 अन्य लोगों को भी बांटा गया पेपर: एक अधिकारी के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि दिनेश ने यह पेपर लगभग 10 अन्य लोगों के साथ भी शेयर किया था।
अब अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या दिनेश के बेटे ने सीकर की कोचिंग में अपने दोस्तों के बीच इस पेपर को आगे भेजा, जिससे सीकर के कोचिंग इकोसिस्टम में यह बड़े स्तर पर फैल गया।
सीकर के एक 'ईमेल' से खुला पेपर लीक का राज
सीकर के एक कोचिंग संस्थान के फैकल्टी मेंबर ने सबसे पहले व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स में वायरल हो रहे इस 'गेस पेपर' को देखा था। जब उन्होंने पाया कि इसमें नीट के असली पेपर से मिलते-जुलते कई सवाल थे, तो उन्होंने तुरंत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इसकी जानकारी ईमेल के जरिए दी।
8 मई को यह सूचना जयपुर के एसओजी मुख्यालय पहुंची। इसके बाद एसओजी की टीमें उसी दिन सीकर पहुंचीं और छात्रों व अन्य संदिग्धों से गुपचुप तरीके से पूछताछ शुरू कर दी। इसी शुरुआती जांच में 'आरके कंसल्टेंसी' नाम से एक फर्म चलाने वाले राकेश मंडावरिया का नाम सामने आया, जिसे 8 मई को ही हिरासत में ले लिया गया।
राजस्थान सरकार की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में राज्य सरकार और अधिकारियों की देरी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 8 से 10 मई के बीच ही एसओजी को वायरल कंटेंट और असली नीट पेपर में काफी समानताएं मिल गई थीं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने न तो तुरंत कोई अलर्ट जारी किया और न ही कोई एफआईआर दर्ज की। मामला जब पब्लिक फोरम पर उछलने लगा, तब तक राज्य सरकार केवल एनटीए के मूल्यांकन और जांच सीबीआई को सौंपने के केंद्र के फैसले का इंतजार ही करती रही।
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लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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