कॉकरोचों के प्रदर्शन ने बदल दी तस्वीर, कैसे बैकफुट पर आया दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा NDA?

हिन्दुस्तान टीम
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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का पूरा फायदा इस बार विपक्ष ने उठाया है। संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहा। बार-बार की कोशिश के बावजूद पूरे सत्र में सदन की कार्यवाही ठीक से नहीं चल पाई।

Rahul Gandhi
छात्र आंदोलन से कांग्रेस को फायदा, सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहा विपक्ष

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले हुए राजनीतिक घटनाक्रम से विपक्ष जहां मनोवैज्ञानिक दबाव में था, वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के पाला बदलने से एनडीए के हौसले बुलंद थे। लेकिन पेपर लीक को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई ने तस्वीर बदल दी। संसद के अंदर और बाहर विपक्ष पर हमेशा हमलावर रहने वाली भाजपा और सरकार बैकफुट पर आ गई।

विपक्ष ने उठाया सियासी फायदा

कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष इस मौके का पूरा सियासी फायदा उठाने में सफल रहा। सत्र के बीच बांकीपुर (बिहार) और दतिया (मप्र) उप चुनाव में भाजपा की शिकस्त से भी विपक्ष का हौसला और आक्रामकता बढ़ी। विपक्ष के सख्त तेवरों से जहां सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों से दूर रही, वहीं सरकार ने एफसीआरए विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने में अपनी भलाई समझी।

तमिलनाडु में कांग्रेस के थलपति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने से डीएमके नाराज थी, पर पूरे मानसून सत्र के दौरान ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब डीएमके विपक्ष से अलग खड़ी नजर आए। हालांकि, डीएमके पूरे सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली बैठक से दूर रही। पर नीट और कावेरी जल समझौता सहित अन्य मुद्दों पर डीएमके के तेवर सख्त रहे।

नहीं टूटी विपक्षी एकता

वंदे मातरम् बिल का डीएमके ने कड़ा विरोध किया। डीएमके सांसद कनिमोझी ने इसे राष्ट्रवाद की आड़ में छिपा हिंदुत्व का एजेंडा करार दिया। चढ़ावा चोरी व छात्रों पर कार्रवाई के खिलाफ विपक्ष एकजुट रहा। वहीं, मुद्दों पर कांग्रेस और सपा के बीच तालमेल भी दिखा। चढ़ावा चोरी पर जहां सपा आगे रही और कांग्रेस उसके पीछे खड़ी हुई। वहीं, छात्रों पर कार्रवाई पर गृह मंत्री के बयान की मांग की अगुवाई कांग्रेस ने की और सपा समेत पूरे विपक्ष ने उसका समर्थन किया। यही वजह रही कि तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार विपक्षी एकजुटता को तोड़ने में विफल रही।

मुद्दे बरकरार रखना होगी बड़ी चुनौती

विपक्षी दल संसद के जरिए चढ़ावा चोरी और छात्रों पर कार्रवाई के मुद्दे को पूरे देश तक पहुंचाने में सफल रहा है, पर चढ़ावा चोरी को यूपी विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखना आसान नहीं है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा यूपी में सपा और कांग्रेस दोनों मिलकर इस मुद्दे को बरकरार रखने की कोशिश करेंगे। वहीं, छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस छात्रों की गूंज से पूरे देश में उठाएगी। जिला स्तर पर भी कार्यक्रम होंगे।

इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई

नीट परीक्षा और छात्र प्रदर्शन विवाद: विपक्ष इस मुद्दे पर लंबी और निर्बाध चर्चा की मांग कर रहा था, जिस पर सहमति न बनने से गतिरोध बना रहा।

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक: हंगामे के बाद इसे आगे की समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजना पड़ा।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक: एकल उच्च शिक्षा नियामक बनाने वाले इस बिल पर विस्तृत बहस अधूरी रही और यह समिति के पास लंबित रहा।

जनहित से जुड़े शून्यकाल के मुद्दे: लगातार स्थगन के कारण कई सांसदों के अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे सदन के पटल पर नहीं आ सके।

संसद चलाने में प्रतिदिन नौ करोड़ रुपये होते हैं खर्च

संसद का एक सत्र चलाने में औसतन 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट का खर्च आता है। यह अनुमान सबसे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने संसद में दिया था, जिसे बाद के वर्षों में भी दोहराया गया है। इसके हिसाब से संसद पर प्रतिदिन लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 15 से 20 दिन के एक सत्र का कुल खर्च 135 करोड़ से 180 करोड़ रुपये तक बैठता है। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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