मुसलमानों में राष्ट्रवादी नेता मिलना अब मुश्किल, संघ नेता दत्तात्रेय होसबाले ने वजह भी बताई
आरएसएस के सीनियर लीडर दत्तात्रेय होसबाले का कहना है कि मुसलमानों के बीच अब राष्ट्रवादी नेतृत्व मिलना मुश्किल है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह बात कही। होसबाले ने कहा कि आज के समय में कट्टर मुसलमान नेता हैं, तभी आपको समर्थन मिलेगा वरना मुश्किल स्थिति होगी।

आरएसएस के सीनियर लीडर दत्तात्रेय होसबाले का कहना है कि मुसलमानों के बीच अब राष्ट्रवादी नेतृत्व मिलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि आज के वक्त में ऐसी स्थिति हो गई है कि ऐसे मुसलमान नेता को ही समर्थन मिलता है, जो अलगाववादी विचार रखने वाला हो। उन्होंने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवादी मुसलमान नेता हुआ करते थे, लेकिन आज ऐसे लोगों को समर्थन ही नहीं मिल पा रहा। आरएसएस के सरकार्यवाह ने यह बात असदुद्दीन ओवैसी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही। उनसे पूछा गया था कि ओवैसी कहते हैं कि मुसलमानों को अपनी लीडरशिप खड़ी करनी चाहिए क्योंकि उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
ओवैसी का कहना है कि कथित सेकुलर पार्टियां मुसलमानों के मुद्दे नहीं उठातीं और उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। इस पर होसबाले ने कहा कि यह तो ओवैसी पर ही छोड़ना चाहिए। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि उनके ही मजहब के लोग उस बात को कैसे देखते हैं। होसबाले ने कहा, 'सच्चाई यह है कि मुसलमानों में राष्ट्रवादी नेतृत्व का फिलहाल अभाव है, जैसा स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान होता था। अब ऐसे लोग मिलना मुश्किल है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पाकिस्तान बनने के बाद भारत में छद्म पंथनिरपेक्ष दल उभरे और उनकी नीतियों के चलते ऐसी स्थितियां पैदा हुईं।'
उन्होंने कहा कि यही समस्या है। आज भी कुछ राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता हैं, लेकिन उन्हें उस तरह का समर्थन नहीं मिलता है। यदि आपको मुसलमान नेता होते हुए समर्थन पाना है तो फिर अलगाववादी होना होगा और समुदाय का तभी साथ मिलेगा। उनसे पूछा गया कि क्या आप मानते हैं कि मुसलमानों की अपनी लीडरशिप नहीं होनी चाहिए? इस पर होसबाले ने कहा कि ऐसा नहीं है। नेतृत्व सही चीज है। हर समुदाय की अपनी लीडरशिप रहनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक दलों का गठन यदि मजहब के आधार पर होता है तो वह गलत है।
'केरल में तो ईसाई समुदाय के नाम पर भी बन गई हैं पार्टियां'
संघ के दूसरे नंबर के नेता ने कहा कि भारत का संविधान हर तरह के समायोजन की बात करता है, लेकिन जब धर्म के आधार पर ही बातें होती हैं तो फिर समस्या पैदा होती है। उन्होंने कहा कि आज हम देखते हैं कि देश में ऐसे कई दल हैं, जो धर्म के आधार पर चल रहे हैं। केरल में ईसाई समुदाय से जुड़े दल हैं। इसी तरह सिख आधारित पार्टियां भी हैं। उन्होंने कहा कि देश में इस संबंध में चर्चा करने की जरूरत है। एक समय में पंडित नेहरू, संपूर्णानंद और महात्मा गांधी जैसे नेताओं के बीच इसे लेकर बात हुई थी।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Surya Prakashदुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।
अकादमिक योग्यता: एक तरफ डेढ़ दशक का सक्रिय पत्रकारिता करियर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सूर्यप्रकाश अकादमिक अध्ययन में भी गहरी दिलचस्पी रखते रहे हैं। पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ ही 'हाइब्रिड वारफेयर में मीडिया के इस्तेमाल' जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषय पर पीएचडी शोध कार्य भी किया है। पत्रकारिता, समाज, साहित्य में रुचि के अलावा वारफेयर में मीडिया के प्रयोग पर भी गहरा अध्ययन किया है। इसी कारण डिफेंस स्टडीज जैसे गूढ़ विषय में भी वह रुचि रखते हैं। इस प्रकार सूर्यप्रकाश का एक लंबा पेशेवर अनुभव रहा है तो वहीं गहरी अकादमिक समझ भी रही है।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।
और पढ़ें

