बंगाल में मुख्यालय और त्रिपुरा में बेस; TMC के बागियों का नया ठिकाना NCPI, जानें इतिहास

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नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) भारतीय चुनाव आयोग में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल है। हालांकि, इसे अभी राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा नहीं मिला है।

बंगाल में मुख्यालय और त्रिपुरा में बेस; TMC के बागियों का नया ठिकाना NCPI, जानें इतिहास

पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की राजनीति में लंबे समय से लगभग अज्ञात रही नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अचानक राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है। चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड इस छोटे राजनीतिक दल का नाम तब सुर्खियों में आया जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने इसी पार्टी में विलय का रास्ता चुना। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का चुनावी इतिहास बेहद सीमित रहा है, लेकिन उसका चुनाव आयोग में पंजीकृत होना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया चुनाव आयोग के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है। इसका दर्जा पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का है। इसका अर्थ है कि पार्टी कानूनी रूप से मान्य राजनीतिक संगठन है, लेकिन वह राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए आवश्यक वोट प्रतिशत या सीटों की शर्तें पूरी नहीं कर पाई है। यही कानूनी मान्यता हाल के राजनीतिक घटनाक्रम में अहम बन गई, क्योंकि किसी मान्य रजिस्टर्ड दल में विलय होने से बागी सांसदों को दलबदल कानून से जुड़ी जटिलताओं से बचने का आधार मिल सकता है।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा NCPI का मुख्यालय

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में स्थित है। हालांकि इसके संगठनात्मक और चुनावी गतिविधियों का केंद्र मुख्य रूप से त्रिपुरा रहा है। पार्टी ने समय-समय पर त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार उतारे हैं। वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी एनसीपीआई ने 2 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। हालांकि पार्टी को कोई सीट नहीं मिली और उसके उम्मीदवारों का प्रदर्शन सीमित रहा। इसके अलावा असम के कुछ क्षेत्रों में भी पार्टी ने बंगाली भाषी समुदायों के मुद्दों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया है।

NCPI का चुनाव चिह्न क्या है

एनसीपीआई की एक और खास बात यह है कि उसके पास कोई स्थायी चुनाव चिह्न नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के कमल और कांग्रेस के हाथ जैसे आरक्षित चुनाव चिह्न केवल मान्यता प्राप्त दलों को मिलते हैं। चूंकि एनसीपीआई एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है, इसलिए उसे हर चुनाव में चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले फ्री सिंबल में से चयन करना पड़ता है। हालांकि चुनाव आयोग के नियमों के तहत वह किसी विशेष चुनाव के लिए एक साझा चुनाव चिह्न आवंटित कराने का आवेदन कर सकती है, लेकिन यह सुविधा स्थायी नहीं होती।

TMC के बागियों को क्या होगा फायदा

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पार्टी का वास्तविक महत्व उसके चुनावी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि उसके कानूनी अस्तित्व में छिपा है। वर्षों तक बेहद सीमित गतिविधियों वाली यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आई जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बागी सांसदों ने इसे अपने नए राजनीतिक मंच के रूप में चुना। इससे पार्टी का स्वरूप और नेतृत्व भी बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद पार्टी में शामिल वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली होगी।

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी राजनीतिक दल को मान्यता प्राप्त करने के लिए राज्य में कम से कम 6 प्रतिशत वैध मत हासिल करने या निर्धारित संख्या में विधानसभा या लोकसभा सीटें जीतने जैसी शर्तें पूरी करनी होती हैं। एनसीपीआई अभी तक इन मानकों को हासिल नहीं कर पाई है, इसलिए उसका दर्जा पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल का बना हुआ है। इसके बावजूद, हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने यह दिखा दिया है कि भारतीय राजनीति में कभी-कभी छोटे और लगभग अनजान दल भी बड़े राजनीतिक समीकरणों का केंद्र बन सकते हैं।

Niteesh Kumar

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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