
'वोट चोरी' के आरोपों को NC के सांसद ने खारिज किया, बोले- कश्मीर में साफ-सुथरे चुनाव हुए
चौधरी मोहम्मद रमजान ने कहा, ‘यहां सभी लोगों ने कहा कि चुनाव साफ सुथरे होने चाहिए। लेकिन मैं अपने राज्य की बात करूंगा। 2024 में जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए और यह इलेक्शन एकदम साफ-सुथरे थे। इस चुनाव के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार आई और कांग्रेस भी इस सरकार का हिस्सा है।’
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आरजेडी जैसे INDIA अलायंस के दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि चुनावों में धांधली हो रही है। इन विपक्षी दलों की ओर से चुनावों में गड़बड़ी होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन दलों का कहना है कि चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से कराने चाहिए। इसके अलावा चुनाव आयोग की ओर से SIR कराने को लेकर भी राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हैं। लेकिन सोमवार को संसद में अलग ही माहौल दिखा। विपक्षी अलायंस के ही सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान ने कहा कि 2024 में जम्मू-कश्मीर में साफ-सुथरे चुनाव हुए थे।
चौधरी मोहम्मद रमजान ने कहा, 'यहां सभी लोगों ने कहा कि चुनाव साफ सुथरे होने चाहिए। लेकिन मैं अपने राज्य की बात करूंगा। 2024 में जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए और यह इलेक्शन एकदम साफ-सुथरे थे। इस चुनाव के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार आई। दो-तिहाई बहुमत से बनी इस सरकार में कांग्रेस साथ है और कुछ अन्य लोग भी साथ हैं।' इस तरह चौधरी मोहम्मद रमजान ने चुनाव आयोग को इलेक्शन में धांधली के आरोपों से क्लीन चिट दे दी। इस पर अब तक विपक्षी दलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
निश्चित तौर पर चौधरी मोहम्मद रमजान का बयान विपक्ष के नैरेटिव को झटका देने वाला है। हरियाणा, महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को लेकर सीधे राहुल गांधी ही आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि दोनों राज्यों से बड़े पैमाने पर लोगों के वोट काट दिए गए और फर्जी वोटरों को जोड़ा गया। इसके अलावा बिहार चुनाव में भी गड़बड़ी के आरोप कांग्रेस और आरजेडी लगातार लगा रहे हैं। अखिलेश यादव के भी ऐसे ही सुर रहे हैं। लेकिन उमर अब्दुल्ला के एक सांसद की ओर से दिए गए बयान ने पूरे मामले में विपक्ष के नैरेटिव को झटका दिया है। गौरतलब है कि उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब विपक्ष की ओर से SIR को लेकर संसद में हंगामा किया जा रहा है।
चुनावों को बताया सही, पर एक सवाल उठा दिया
हालांकि मोहम्मद रमजान ने यह सवाल जरूर उठाया कि जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार के पास ज्यादा अधिकार नहीं हैं। उसकी बजाय ज्यादातर शक्तियां तो केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए उपराज्यपाल के पास हैं।





