

कोई कितना क्रूर हो सकता है। दरिंदा कितना भी बड़ा हो, लेकिन चीखें, दर्द सुनकर तो दिल जरूर पसीजता होगा। हालांकि, महाराष्ट्र के नागपुर से आया एक केस इन सभी बातों को झूठा साबित करता है। जब स्थानीय पुलिस मामले की जांच के लिए कमरे के अंदर दाखिल हुई, तो उनकी आंखों ने जो देखा, वो शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। राहत की बात है कि पीड़िता को बचा लिया गया है।
रोंगटे खड़े कर देने वाली इस वारदात की स्क्रिप्ट की शुरुआत इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती से मानी जा सकती है। यही दोस्ती बाद में निजी तस्वीरें, ब्लैकमेल और यौन उत्पीड़न तक पहुंच गई थी। फिलहाल, जांच जारी है।
नागपुर में एक 16 वर्षीय लड़की का कथित रूप से अपहरण कर लिया गया, उसे किराए के फ्लैट में बंधक बनाकर रखा गया, बेरहमी से शारीरिक यातना दी गई और यौन उत्पीड़न किया गया। यह सब 19 वर्षीय एक युवक ने किया जिससे लड़की की दोस्ती इंस्टाग्राम पर हुई थी। यह जानकारी पुलिस ने बुधवार को दी।
पुलिस के अनुसार, 12वीं कक्षा की छात्रा की पिछले कुछ महीने पहले आरोपी से ऑनलाइन दोस्ती हुई थी। आरोपी ठाणे के एक जाने-माने डॉक्टर का बेटा और महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का भतीजा है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी आकाश मेहरा की फर्जी पहचान बनाकर पीड़िता के संपर्क में था और पिछले साल दो बार नागपुर गया था। आरोपी ने लड़की से मिलने के बहाने उसे हुडकेश्वर इलाके में एक किराए के मकान में बुलाया और फिर 24 घंटे से ज्यादा समय तक उसे बंधक बनाकर रखा। बंधक बनाए जाने के दौरान, पीड़िता के साथ बार-बार मारपीट और यौन शोषण किए जाने का आरोप है।
यह मामला तब सामने आया जब लड़की के परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद हुडकेश्वर पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने उस किराए के फ्लैट में पीड़िता के होने का पता लगाया।
पुलिस ने जबरदस्ती अपार्टमेंट में घुसकर देखा कि एक नाबालिग लड़की जिंदा थी लेकिन वह हथकड़ी पहने हुए थी और उसे बिस्तर के रेलिंग से बांधा गया था। पुलिस ने बताया कि उसे शरीर के कई हिस्सों में चोट आई थीं, जिनमें चाकू के घाव और कोड़े के निशान शामिल थे।
लड़की को मेडिकल जांच और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि फोरेंसिक और डीएनए विशेषज्ञों ने सबूत इकट्ठा करने के लिए घटनास्थल का दौरा किया। आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और उस पर भारतीय न्याय संहिता और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच जारी है।
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