Explainer: रिटायर्ड IAS vs कांग्रेस की पुरानी पकड़, ऊपर से बगावत का डर; नौगांव में किसका खेल बिगड़ेगा?
कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने अभी अंतिम उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। टिकट के लिए पांच नेताओं ने आवेदन किया था।

असम में नौगांव उपचुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ एक लोकसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में जाने के बाद अपनी सीट बचाने की बड़ी चुनौती है। 2024 में कांग्रेस के बोरदोलोई ने नौगांव में बीजेपी के सुरेश बोरा को 2.12 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था और करीब 50.89 फीसदी वोट हासिल किए थे। लेकिन बाद में बोरदोलोई कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए और दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए। अब 6 अक्टूबर को होने वाला उपचुनाव यह तय करेगा कि बोरदोलोई के जाने के बाद भी कांग्रेस नौगांव को अपने कब्जे में रख पाती है या नहीं।
भाजपा ने नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए रिटायर IAS देबाशीष शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। अगर बीजेपी के देबाशीष नौगांव से जीतते हैं तो कांग्रेस का एक मौजूदा लोकसभा सांसद कम हो जाएगा और 2029 तक इस लोकसभा में उसकी भरपाई का कोई रास्ता नहीं होगा। कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने अभी अंतिम उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 28 अगस्त को टिकट के लिए पांच नेताओं ने आवेदन किया था। इनमें सिबामोनी बोरा, पूर्व विधायक दुर्लव चामुआ, इमदाद हुसैन, मैदुल इस्लाम खान और रंजीत बरमन शामिल हैं।
सिबामोनी बोरा टिकट की प्रबल दावेदार
कांग्रेस के भीतर सिबामोनी बोरा को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सिबामोनी 2021 में बटद्रवा से कांग्रेस विधायक चुनी गई हैं और असम कांग्रेस की महासचिव भी हैं। खास बात यह है कि वह असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री और जनता पार्टी के नेता गोलाप बोरबोरा की बहू हैं। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोरदोलोई की पकड़ की भरपाई करना होगी। 2019 और 2024 में नौगांव से लगातार दो बार कांग्रेस जीती, लेकिन उससे पहले 2004, 2009 और 2014 में बीजेपी के राजेन गोहेन ने लगातार तीन चुनाव जीते थे।
2019 में बोरदोलोई ने बीजेपी के रूपक शर्मा को सिर्फ करीब 1.12 प्रतिशत वोट के अंतर से हराया था। 2024 में जरूर कांग्रेस की बढ़त काफी बड़ी हो गई और पार्टी को 50.89 फीसदी वोट मिले। अब बीजेपी ने पूर्व आईएएस अधिकारी और नौगांव के पूर्व जिला आयुक्त देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारा है। शर्मा के प्रशासनिक अनुभव के साथ स्थानीय पहचान बीजेपी के लिए फायदा हो सकती है। वहीं कांग्रेस पहले ही उनके जिला आयुक्त रहते लिए गए फैसलों की समीक्षा की मांग निर्वाचन आयोग से कर चुकी है।
कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां
कांग्रेस के लिए एक और मुश्किल विपक्षी वोटों का बंटवारा है। कांग्रेस ने AIUDF के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन एआईयूडीएफ ने अलग उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। इससे मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटों का बंटवारा कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है। नौगांव का चुनावी इतिहास भी बताता है कि यहां मुकाबला अक्सर करीबी रहा है। 2014 में कांग्रेस बीजेपी से 11.67 प्रतिशत वोट से हारी थी, जबकि 2009 में हार का अंतर करीब 4.5 प्रतिशत रहा था। ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनौती आसान नहीं रहने वाली है।


