लाउडस्पीकर मामले में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा, शुभेंदु अधिकारी से मिले दो सांसद
खान ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पुलिस ने बिना किसी सरकारी आदेश के मस्जिद प्रबंधन पर माइक्रोफोन हटाने के लिए दबाव डाला। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाने के लिए समय नहीं दिया। वे जरूरत से ज्यादा सक्रिय हैं।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के दो एनसीपीआई सांसदों ने शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई रोकने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस ने जरूरत से ज्यादा सक्रियता दिखाई है। इसके अलावा उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए करीब 27 लाख लोगों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।
सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक से एक दिन पहले मुर्शिदाबाद सीट से सांसद अबू ताहेर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने राजधानी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से कई गठबंधन सहयोगी दलों के सांसदों के लिए आयोजित नाश्ता बैठक में हिस्सा लिया था। खान ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि लाउडस्पीकर के मुद्दे पर राज्य में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियम सभी धार्मिक समुदायों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
खान ने कहा, "मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाना हमारे लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। मस्जिदों में अजान के लिए इस्तेमाल होने वाले माइक्रोफोन हटाया जाना आजादी के बाद से अभूतपूर्व है। बंगाल में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। हमने सरकार से इसे रोकने का आग्रह किया है।" ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए अदालत के निर्देशों का पालन किए जाने की बात कहते हुए खान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया है कि करीब 3,800 माइक्रोफोन हटाए गए हैं, जिनमें लगभग 1,200 मंदिरों के माइक्रोफोन भी शामिल हैं।
खान ने कहा, "हमने सरकार से अनुरोध किया है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। हम उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन करेंगे। लेकिन मस्जिदों से माइक्रोफोन नहीं हटाए जाने चाहिए। नमाज अदा करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। हमने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने में राज्य पुलिस के जरूरत से ज्यादा सक्रिय होने का आरोप लगाते हुए खान ने कहा, "कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। हम सभी धर्मों के बीच सद्भाव चाहते हैं। हमने मुख्यमंत्री से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई रोकने की अपील की है और उन्होंने कहा है कि वह इस मामले पर गौर करेंगे।"
खान ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पुलिस ने बिना किसी सरकारी आदेश के मस्जिद प्रबंधन पर माइक्रोफोन हटाने के लिए दबाव डाला। उन्होंने कहा, ''पुलिस ने मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाने के लिए समय नहीं दिया। वे जरूरत से ज्यादा सक्रिय हैं।" उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को दो दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने भी उठाया गया था। एसआईआर के मुद्दे पर दोनों सांसदों ने शुभेंदु से लंबित मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
खान ने कहा, ''कई वास्तविक मतदाता, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, वे न्यायाधिकरण के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। देरी के कारण पासपोर्ट सत्यापन, जमीन का पंजीकरण और सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें आ रही हैं। हमने राज्य सरकार से सुनवाई में तेजी लाने और प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी करने का अनुरोध किया है।'' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि जिन 27 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें से लगभग सात लाख लोगों ने सुनवाई के लिए आवेदन किया है, जबकि बाकी 20 लाख लोगों ने आवेदन नहीं किया है।
खान ने कहा, "हमने मुख्यमंत्री को बताया कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं, जो कागजी प्रक्रिया को ठीक से नहीं समझते, वे कामकाजी लोग हैं। वे वास्तविक मतदाता हैं। हम चाहते हैं कि उन सभी के नाम फिर से जोड़े जाएं। इन लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। पत्रों में वर्तनी की गलतियां और अन्य त्रुटियां हैं।" मुर्शिदाबाद के सांसद ने कहा, "इन्हीं गलतियों के कारण 27 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा।" उन्होंने यह दावा भी किया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सात लाख अपीलों की जल्द सुनवाई के लिए व्यवस्था की जाएगी। खान ने कहा, "हमने मुख्यमंत्री से यह भी कहा है कि सुनवाई बड़े स्तर पर होनी चाहिए, यहां तक कि प्रखंड स्तर पर भी। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि सरकार इस दिशा में हरसंभव प्रयास करेगी।"


