जस्टिस वर्मा बरी भी हो गए तो भी कोई उन्हें ईमानदार नहीं मानेगा, मीडिया ट्रायल पर भड़के रोहतगी

Jan 17, 2026 01:51 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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रोहतगी ने मीडिया ट्रायल को आज हमें डुबो रही सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया और कहा कि सोशल मीडिया की तुलना में मुख्यधारा का मीडिया अधिक खतरनाक है क्योंकि उसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

जस्टिस वर्मा बरी भी हो गए तो भी कोई उन्हें ईमानदार नहीं मानेगा, मीडिया ट्रायल पर भड़के रोहतगी

वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि मीडिया ट्रायल में किसी न्यायाधीश की पूरी न्यायिक यात्रा को हमेशा के लिए खत्म कर देने की क्षमता होती है। उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक चलने वाली नकारात्मक मीडिया कवरेज से होने वाला नुकसान अदालत से बरी होने के बाद भी वापस नहीं होता।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, रोहतगी ने कहा- एक जज का मामला है, जिनके घर से कथित तौर पर पैसा मिलने की बात कही गई। पूरे मीडिया ने उन्हें काला रंग दिया… अगर अंत में उन्हें बरी भी कर दिया गया, तब भी कोई नहीं मानेगा कि वह ईमानदार जज थे। उनका करियर खत्म हो चुका होगा, चाहे केस का नतीजा कुछ भी हो।” हालांकि उन्होंने उस जज का नाम नहीं लिया।

गौरतलब है कि रोहतगी ने जस्टिस वर्मा की ओर से उस याचिका में पैरवी की थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के एक फैसले को चुनौती दी गई थी। लोकसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले में न्यायाधीशों की (जांच) अधिनियम के अंतर्गत जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस याचिका को खारिज कर दिया।

रोहतगी ने ये टिप्पणियां 16 जनवरी को आयोजित एक पैनल चर्चा में कीं जहां वे एक पुस्तक के विमोचन के लिए गए थे। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सिवल बिलीमोरिया भी मौजूद थे। रोहतगी ने कहा कि टीवी चैनलों पर लगातार दिखाए जाने वाले दृश्य, आरोपों की पुनरावृत्ति और दृश्यात्मक उभार अदालत द्वारा साक्ष्य की जांच से पहले ही तत्काल न्याय का माहौल बना देते हैं। उन्होंने मीडिया ट्रायल को आज हमें डुबो रही सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया और कहा कि सोशल मीडिया की तुलना में मुख्यधारा का मीडिया अधिक खतरनाक है क्योंकि उसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है। उन्होंने कहा- आप किसी व्यक्ति की शक्ल को टीवी पर पचास लाख बार दिखाते हैं और कहते हैं कि यह आदमी गैंगस्टर है। यह सोशल मीडिया से कहीं ज्यादा तबाही मचाता है।

अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को स्वीकार करते हुए भी रोहतगी ने कहा कि मीडिया ने निजता, गरिमा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की सीमाएं लांघ दी हैं। मीडिया के लिए विशेष ट्रिब्यूनल बनाए जाने के सुझाव को भी उन्होंने खारिज कर दिया। रोहतगी का कहना था कि भारत में ट्रिब्यूनलीकरण एक असफल प्रयोग रहा है, क्योंकि ऐसे निकायों में संवैधानिक सुरक्षा का अभाव होता है और वे कार्यपालिका के प्रभाव में आ सकते हैं, जबकि उच्च न्यायालय अपेक्षाकृत स्वतंत्र हैं।

वहीं, बिलीमोरिया ने मुख्यधारा के मीडिया में फैल रही गलत जानकारियों के न्यायिक सोच पर असर की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़े एक चल रहे मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अदालतें इस गलत धारणा से प्रभावित हो रही हैं कि कुत्ते नियमित रूप से बच्चों को मार देते हैं। उन्होंने कहा- आज हमारे जज सचमुच मानते हैं कि कुत्ते बच्चों को मारते हैं, जबकि यह सच्चाई नहीं है… हम एक इको चैंबर में नहीं रह सकते।

बिलिमोरिया के अनुसार, बार-बार की मीडिया रिपोर्टिंग और एल्गोरिद्म-आधारित प्रसार से एक ऐसा इको चैंबर बन गया है, जहां अप्रमाणित दावे भी स्थापित तथ्य जैसे लगने लगते हैं। यह प्रक्रिया न केवल सोशल मीडिया बल्कि टीवी चैनलों के जरिये भी हो रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि जजों को अदालत के बाहर गढ़ी गई कथाओं के आधार पर फैसले देने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि देश भर के पशु कल्याण संगठनों ने आवारा कुत्तों को मनमाने तरीके से हटाने का विरोध किया है।

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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