मीनाक्षी नटराजन का खेल कांग्रेसियों ने ही बिगाड़ा, सीट पर कई लोगों की थी नजर; किसने किया दावा
कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यसभा चुनाव में 'सीट चोरी' के आरोपों को नकारते हुए बुधवार को दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का 'खेल बिगाड़ने' का काम उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने किया, क्योंकि उनमें से कई की नजर उस सीट पर थी। राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।
अधूरा हलफनामा
राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत की शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था।
भाजपा उम्मीदवार ने की थी शिकायत
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है।
कांग्रेस ने लगाए सीट चोरी के आरोप
कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है।
सीएम मोहन यादव के आरोप
मुख्यमंत्री यादव ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 'जानबूझकर' और 'षडयंत्रपूर्वक' नटराजन के फॉर्म में गलतियां कीं। उन्होंने दावा किया, 'इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी। जब सीट नहीं मिली तो नटराजन का खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने ही कर दिया।' यादव ने कहा कि पंच और सरपंच के चुनाव तक में आपराधिक ब्योरा देना होता है और जब 10 से अधिक बार से चुनाव लड़ चुके लोग राज्यसभा जैसे प्रतिष्ठित चुनाव में ऐसी गलतियां करते हैं तो यह अनायास नहीं है। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया 'षडयंत्र' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को 'आत्मावलोकन' करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में हराकर भाजपा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ठीक से अपने प्रत्याशी का फार्म नहीं भर सकती, विधायकों को एकजुट नहीं रख सकती और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकती तो इसमें भाजपा क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी गलतियां देखनी चाहिए और प्रत्याशी घोषित करने से पहले कम से कम उसकी पृष्ठभूमि जांच लेनी चाहिए।
इससे पहले, राज्य सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को दावा किया था नटराजन मामले में तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं ने ही जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए थे।
कहां से मिले दस्तावेज
नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, 'जहां तक हमें मिले दस्तावेजों का सवाल है, उन्हें हमें किसने दिया? आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस किस राज्य में है? मुद्दा यह है कि हमें तेलंगाना से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। एक ऐसा राज्य... जहां वे सत्ता में हैं। हमारे पास खुद कोई जानकारी नहीं थी। यह कांग्रेस के सदस्य होंगे जिन्होंने इसे हमें प्रदान किया होगा।'
राज्य में राज्यसभा की तीन खाली सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा के लिए, दो सीटें जीतना तय था लेकिन नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट भी उसके खाते में जाती दिख रही है। भाजपा ने अपने महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट के लिए मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केवट पर दांव लगाया है।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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