डूबती नाव में कौन बैठे? आधे मुस्लिम विधायकों ने भी छोड़ा ममता का साथ, एक-एक कर बागी गुट में गए; करीबी मेयर का इस्तीफा

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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ठीक एक महीने पहले ममता तृणमूल कांग्रेस का निर्विवाद चेहरा थीं और उनके पास एक मजबूत विधायी शक्ति थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों मिली करारी चुनावी हार ने बंगाल में तृणमूल के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रखा दिया है।

डूबती नाव में कौन बैठे? आधे मुस्लिम विधायकों ने भी छोड़ा ममता का साथ, एक-एक कर बागी गुट में गए; करीबी मेयर का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चीफ ममता बनर्जी को झटके पर झटका लग रहा है। मुस्लिम विधायकों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है और बागी गुट यानी ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गए हैं। हालिया चुनावों में TMC ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 80 सीटें जीती थीं लेकिन उसके 58 विधायकों ने बुधवार को ममता के फैसले की नाफरमानी करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना है। बड़ी बात ये है कि इन 58 विधायकों में से 17-18 मुस्लिम विधायक हैं।

बता दें कि पार्टी के 80 में से 34 मुस्लिम विधायक जीते हैं लेकिन उनमे करीब आधे (17-18) विधायक बागी गुट में शामिल हो गए हैं। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक-बहुल जिलों के कद्दावर नेता शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऋतब्रत गुट में शामिल होने वाले विधायकों में कसबा से विधायक और बंगाल के सबसे बड़े मुस्लिम नेताओं में से एक जावेद अहमद खान भी शामिल हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के भीतर लोकतंत्र की कमी की आलोचना की थी।

उनके अलावा, सुजापुर (मालदा) से विधायक और TMC सरकार में पहली महिला मुस्लिम मंत्री सबीना यास्मीन, हरिहरपारा से विधायक और मुर्शिदाबाद में TMC के मुख्य आयोजक/जिला अध्यक्ष नियामत शेख, मुर्शिदाबाद से पार्टी का एक प्रमुख चेहरा इमानी बिस्वास और रघुनाथगंज (मुर्शिदाबाद) से विधायक अखरुज्जमान भी शामिल हैं। अखरुज्जमान ने हाल ही में पार्टी द्वारा अल्पसंख्यक वोटों को संभालने के तौर तरीके में कमियों को खुले तौर पर उजागर किया था।

इस बीत, ममता बनर्जी की करीबी नेता कृष्णा चक्रवर्ती ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बिधाननगर नगर निगम की महापौर पद से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी की लंबे समय से सहयोगी रहीं चक्रवर्ती ने आज (गुरुवार को) नगर आयुक्त को अपना इस्तीफा सौंपा। चक्रवर्ती ने पत्रकारों से कहा, ''यह पूरी तरह मेरा निजी फैसला है। मैं 16 साल से इस कुर्सी पर हूं। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मैंने नियमों का पालन करते हुए इस्तीफा दिया है। मैं खुद को कुछ समय देना चाहती हूं। मैं एक पार्षद के रूप में काम करना चाहती हूं।''

नगर निगम के अधिकारियों ने उनका त्यागपत्र मिलने की पुष्टि की। एक अधिकारी ने कहा, ''हमें उनका त्यागपत्र मिल गया है। उन्होंने नगर निकाय मामलों के मंत्री और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी इस्तीफे की प्रति भेजी है।'' इस तरह ममता बनर्जी ने पिछले करीब तीन दशक में जो साख बनाई थी और जो कैडर तैयार किया था, वह भरभराकर गिर चुका है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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