संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, आखिरी दिन मौजूद रहे पीएम मोदी और अमित शाह
संसद का मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित। आखिरी दिन पीएम मोदी और अमित शाह मौजूद रहे। जानें पूरे सत्र में क्या-क्या हुआ।

संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। विपक्ष और सरकार के बीच लगातार टकराव के कारण लगभग पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। मॉनसून सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही 11 बजे आरंभ होने पर लोकसभा अध्यक्ष ने आसन पर बैठते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने के लिए कहा। हालांकि, सामान्यत: सत्र समाप्ति के मौके पर वंदे मातरम् से पहले वह उस सत्र की कार्य उत्पादकता तथा उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं। वंदे मातरम् के गायन के बाद उन्होंने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई अन्य दलों के प्रमुख नेता तथा सदस्य सदन में मौजूद थे। राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। आखिरी दिन हंगामे के बीच राज्यसभा में करीब एक घंटा चर्चा हुई। इसके बाद राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ कार्यवाही समाप्त हो गई।
इन मुद्दों पर भिड़ा रहा विपक्ष
20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र का निर्धारित समापन आज यानी 13 अगस्त को ही होना था, लेकिन बिनी किसी चर्चा के लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। शुरुआत से ही विपक्षी दलों ने दो बड़े मुद्दों पर सदन में जोरदार हंगामा किया। पहला मुद्दा दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से बयान और इस्तीफे की मांग की। दूसरा मुद्दा अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का था। विपक्ष ने इस मामले में भी सरकार से जवाब मांगा।
प्रश्नकाल और शून्यकाल ज्यादातर दिनों में नहीं चल सके
सत्र के दौरान दोनों सदनों में बार-बार स्थगन होता रहा। प्रश्नकाल और शून्यकाल ज्यादातर दिनों में नहीं चल सके। लोकसभा में निर्धारित कामकाज का महज करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 31 प्रतिशत ही हो पाया। कई घंटों का कामकाज हंगामे में बर्बाद हो गया।
हंगामे के बावजूद सरकार ने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए कई विधेयक पारित कराए। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल, टैक्सेशन संशोधन बिल, सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल, एमएसएमई संशोधन बिल, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल समेत कई अहम बिल शामिल हैं। ज्यादातर बिल बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पास हो गए। एफसीआरए संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े बिल जैसे कुछ महत्वपूर्ण विधेयक लंबित रह गए।
अमित शाह ने चर्चा की पेशकश भी की
सरकार का कहना था कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार जवाबदेही से बच रही है। एक दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा की पेशकश भी की, लेकिन गतिरोध बना रहा। सत्र के आखिरी दिन भी हंगामा जारी रहा। अंत में लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मॉनसून सत्र समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह आखिरी दिन सदन में मौजूद थे। यह सत्र हाल के वर्षों के सबसे अधिक प्रभावित सत्रों में शुमार हो गया है, जिसमें विधायी कामकाज तो हुआ, लेकिन संसदीय बहस और जवाबदेही का माहौल लगभग नहीं बन पाया।


