मोहन भागवत का BJP और RSS को संदेश- जेन Z देश विरोधी नहीं, हमसे ज्यादा ईमानदार है

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा करवाने वाले छात्र आंदोलन पर संघ, भाजपा और सरकार को आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने दो टूक संदेश दिया है कि प्रदर्शनकारी बच्चे देश विरोधी नहीं हैं। भागवत ने जेन जी और अल्फा को ईमानदार पीढ़ी बताया है।

पेपर लीक और शिक्षा सुधार के मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर से देश भर में फैला छात्र आंदोलन अब धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद थम गया है, लेकिन उसमें शामिल बच्चे देश विरोधी हैं या देश विरोधी नहीं हैं, इसको लेकर सरकार, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अंदर वैचारिक रूप से मंथन चल रहा है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस आंदोलन को लेकर संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये की 30 जुलाई को कही बातों को एक तरह से पलटते हुए संघ, भाजपा और सरकार को दो टूक संदेश दे दिया है कि आंदोलन में शामिल बच्चे देश विरोधी नहीं हैं। भागवत ने मुंबई में गुरुवार को नई पीढ़ी के बच्चों से संवाद में यह भी कहा कि जेन जी और जेन अल्फा हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार हैं। भागवत ने कहा कि प्रदर्शन संवाद का एक तरीका है और लोकतंत्र चर्चा के जरिए आम सहमति बनाने का एक रास्ता है।

छात्र आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च पर पुलिस के बल प्रयोग के बाद से आंदोलन में शामिल लोगों की राजनीतिक पहचान, उनके मकसद, उनकी फंडिंग, उनकी भाषा पर लगातार ही बहस हो रही है। आंदोलन के दौरान नई पीढ़ी के बच्चों के कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिसमें ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिसको लेकर थानों में केस तक दर्ज हो गए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐसे बच्चों को माफ करने और उनसे संवाद करने का संदेश सरकार से पार्टी तक को दिया है। इस आंदोलन के खत्म होने के बाद मुंबई में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक कार्यक्रम में अतुल लिमये ने कहा था कि यह आंदोलन सिर्फ भाजपा या सरकार के विरोध में नहीं था, बल्कि ये देश और संविधान के विरोध में था। उन्होंने इस आंदोलन की सूत्रधार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की स्थापना से विस्तार तक के क्रम पर गौर करने कहा था।

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अतुल लिमये के बयान से पहले और बाद में संघ, भाजपा और सरकार के समर्थक आंदोलनकारियों की लानत-मलामत में जुटे रहे। इन लोगों पर जेन जी से संवाद बढ़ाने के पीएम मोदी के संदेश का भी बहुत असर नहीं दिख रहा था। ऐसे में संघ परिवार के मुखिया मोहन भागवत ने नई पीढ़ी के बच्चों के साथ संवाद में संचालन कर रहे नौजवान के एक सवाल के जवाब में आंदोलन और जेन जी को लेकर संघ का स्टैंड अंतिम रूप से साफ कर दिया। मोहन भागवत से संचालक ने पूछा- ‘कई बार ऐसा भी लगता है, प्रोटेस्ट में हम निकल आए तो लोग हमें एंटी-नेशनल बुला देंगे। ये लोग किसी देश के एजेंट हैं जैसी बात बोलेंगे।’

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मोहन भागवत ने जवाब दिया- ‘जेन जी यदि प्रदर्शन करती है, तो वो देश विरोधी नहीं है। अपने लोग हैं। अपनी अगली पीढ़ी है। अपनेपन से संवाद का, अपनापन चाहिए, संबंध चाहिए, हमारा संबंध हैं। उसकी मान्यता चाहिए। तब यह संवाद होता है। वहां की बात हमको समझ में आती है। हमारी बात वहां समझ में आती है। यह होता है। तो होना चाहिए। जेन जी वगैरह ऐसी है, ऐसा मैं तो बिल्कुल नहीं मानता। बिना किसी संदर्भ के भी जब-जब पूछा गया तो मैंने बताया और आज भी मैंने आपके सामने बोला है कि मुझे लगता है कि ये जो नई पीढ़ी है, जेन जी, जेन अल्फा, ये अभी जो हमारी मौजूदा पीढ़ी है, उससे ज्यादा ईमानदार है।’

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मोहन भागवत ने संचालक बच्चे के सवाल पर आंदोलन को लेकर कहा- ‘आंंदोलन भी संवाद का एक तरीका है। हम यहां बैठकर बात कर रहे हैं। इसमें समझ में आ गया तो ठीक है। नहीं तो हमारी बहस चलेगी। आप किसी कठिनाई में हो, मैं किसी कठिनाई में हूं। सुलझाना आपके हाथ में है और मेरे हाथ में है। तो मैं चिल्लाऊंगा। मैं आपको वहां से लेकर आऊंगा। ये पहले करो। अर्जेंट है। ऐसा कहूंगा। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक तरीका है।… अब जेन जी बात है, तो अभी जो हुआ है, शिकायत तो सही है। भारत की शिक्षा में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। नहीं हो रहा है, इसलिए बात होती है। संवाद होना चाहिए। संवाद के बाद भी नहीं हो तो क्या करना है, यह बाद की बात है।' भागवत ने आंदोलन के तौर-तरीकों को लेकर कहा कि संविधान का पालन करना चाहिए जो बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने भी बताया है।

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मोहन भागवत ने अपने जमाने की बात करते हुए आगे कहा- 'हम जब जेन जी की आयु में थे, हमारी पीढ़ी का स्वभाव ऐसा था कि बड़े जो कहते थे, मान लेते थे। हम प्रश्न नहीं करते थे। वो उस समय की परिस्थिति थी। अभी जेन जी, अल्फा जो सवाल पूछती है, उनको तार्किक जवाब चाहिए। और इसके साथ प्यार चाहिए। प्यार है तो ही जवाब दे सकते हैं।… हमलोगों को भी ऐसा देखना चाहिए कि अगर जेन जी चिल्ला रहे हैं तो विरोध के लिए ही नहीं चिल्ला रहे हैं, कुछ तकलीफ है, इसलिए चिल्ला रहे हैं, उसको ठीक करना चाहिए।’

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

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रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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