3 विधायक से 2 तिहाई बहुमत; 46 साल इंतजार; कैसे 10 साल में ही मोदी-शाह बंगाल में लाए BJP सरकार?

Ritesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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BJP Electoral Growth in Bengal: पश्चिम बंगाल में भाजपा के तीन विधायकों की संख्या को नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने 10 साल के अंदर दो तिहाई बहुमत तक पहुंचा दिया है। अब बंगाल में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनेगी।

3 विधायक से 2 तिहाई बहुमत; 46 साल इंतजार; कैसे 10 साल में ही मोदी-शाह बंगाल में लाए BJP सरकार?

BJP Electoral Growth in Bengal: कांग्रेस और वाम मोर्चा के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गढ़ बन गए पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की डबल इंजन सरकार बन रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत से ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा अब वहां भी डबल इंजन सरकार बनाती दिख रही है। भाजपा का 3 विधायकों से 207 सीट जीतने का सफर महज 10 साल में पूरा हो गया है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी को दिया जा रहा है। लोकसभा में बंगाल से भाजपा का सफर तो 1998 में ममता बनर्जी से गठबंधन से शुरू हुआ था, लेकिन विधानसभा में पहला भाजपा विधायक 2016 में पहुंच पाया। 10 साल में भाजपा ने 35 परसेंट वोट बढ़ाकर तीन बार से लगातार सत्ता में काबिज ममता बनर्जी सरकार की विदाई कर दी। ममता खुद अपनी सीट भी नहीं बचा सकीं।

बंगाल में भाजपा की जीत नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और अमित शाह के चुनाव प्रबंधन की प्रतीक है। 2016 में विमल गुरुंग के गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से अलायंस में भाजपा के 3 विधायक जीते थे। गुरुंग की पार्टी 3 सीट लड़ी, लेकिन जीरो पर रह गई। भाजपा 10.16 फीसदी वोट के सात 3 सीट जीती थी। 2021 के चुनाव में भी भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन लगभग 38 फीसदी वोट और 77 सीट के साथ दूसरे नंबर पर रह गई। ममता बनर्जी की टीएमसी ने 48 परसेंट वोट के साथ तीसरी बार सरकार बना ली थी।

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चुनाव आयोग ने इस बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद चुनाव करवाया, जिससे बड़ी संख्या में नाम कटे। नाम कटे लोग अब भी दावा कर रहे हैं, लेकिन अब उसका कोई फायदा नहीं रहा। भाजपा ने टीएमसी से 2021 के 10 फीसदी के फासले को पाटते हुए 5 फीसदी की बढ़त हासिल कर ली है। भाजपा ने 45.84 फीसदी वोट शेयर और 207 सीट के साथ दो तिहाई बहुमत भी हासिल की है। 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट 8 फीसदी बढ़ा और टीएमसी का वोट 8 परसेंट घटकर 48 से 40.80 फीसदी पर पहुंच गया है।

1971 में जनसंघ का एक विधायक जीता, स्थापना के 36 साल बाद खुला भाजपा का खाता

बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट का वर्चस्व ममता बनर्जी ने 2011 में तोड़ा और ममता का गढ़ भाजपा ने 2026 में ढहा दिया है। लेकिन यहां तक भाजपा को पहुंचने में 46 साल लग गए। 36 साल तो इसमें ही लग गए कि पार्टी का पहला विधायक बंगाल विधानसभा में पहुंचे। 2016 में भाजपा के तीन नेता विधायक बनकर पहली बार सदन में गए थे। 1971 के चुनाव में जनसंघ के प्रफुल्ल कुमार सरकार जलांगी सीट से जीते थे। कुछ और सीटों पर जनसंघ के कैंडिडेट दूसरे और तीसरे नंबर पर भी आए थे। जनसंघ 23 सीट लड़ी थी और 0.82 फीसदी वोट मिला था। जनसंघ 1972 में 16 सीट लड़ी तो लेकिन एक भी सीट नहीं निकली। वोट शेयर भी 0.19 रह गया।

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1977 का विधानसभा चुनाव जनता पार्टी के बैनर तले लड़ा गया। 289 सीटों पर 20 परसेंट वोट के साथ जनता पार्टी ने 29 सीटें निकाली। इस चुनाव के बाद जनसंघ वालों ने जनता पार्टी से निकलकर भाजपा के नाम से नई पार्टी बना ली। बंगाल में 1982 के विधानसभा चुनाव से अब तक भाजपा की चुनाव लड़ी गई सीट, जीती सीट और वोट शेयर का पूरा हिसाब आप नीचे इस चार्ट से समझ सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि कई चुनाव से बंगाल में ठहरी भाजपा की विकास यात्रा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तेज हो गई, जिसकी चुनावी परिणति आज मिली जीत से हुई है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावभाजपा लड़ी- सीटेंभाजपा जीती- सीटेंवोट शेयर (प्रतिशत)
202629420745.84
20212937737.97
2016291310.16
201128804.06
200629 (ममता से गठबंधन)01.93
200126605.19
199629206.45
1991291011.34
19875700.51
19825200.58

ममता बनर्जी की टीएमसी से गठबंधन में भाजपा को लोकसभा में मिली शुरुआती जीत

भाजपा ने आज भले ममता बनर्जी और टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया है, लेकिन लेफ्ट फ्रंट सरकार के जमाने में बंगाल से लोकसभा चुनाव में भाजपा को शुरुआती जीत टीएमसी गठबंधन के साथ ही मिली। 1998 में टीएमसी बनाने वाली ममता बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला। 1998 के आम चुनाव में बंगाल की 42 में 9 सीट एनडीए जीती- टीएमसी के 7 और भाजपा के 2 सांसद दिल्ली पहुंचे। 1999 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 42 में 10 सीट मिली, टीएमसी को 8 और भाजपा को 2 सीट। 2004 के चुनाव में एनडीए को भारी नुकसान हुआ। टीएमसी मात्र 1 सीट जीत पाई, जबकि बीजेपी जीरो पर आउट हो गई।

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2009 में ममता बनर्जी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन के साथ हो गईं। भाजपा 1 सीट जीती। बाकी सीटें लेफ्ट फ्रंट और यूपीए के बीच बंट गई। 2014 के चुनाव में जब देश में मोदी की लहर थी, तब भी बंगाल ने 42 में 34 सीट ममता को दी। बीजेपी मात्र 2 सीट निकाल पाई। अमित शाह 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले ऑपरेशन बंगाल में जुट गए थे। 2019 के आम चुनाव में भाजपा 18 सीटें जीती और ममता के सांसद 34 से घटकर 22 हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता ने ताकत बढ़ाकर 29 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा कुछ कमजोरी के साथ 12 सीटों पर सिमट गई।

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बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा की विकराल जीत से राजनीति में जमीनी बदलाव आएगा। भविष्य के चुनावों में कांग्रेस और लेफ्ट के बाद अब ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए वापसी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगी। यह संकट भविष्य में भाजपा विरोधी दलों के बीच तालमेल की बुनियाद भी बन सकती है।

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Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें