FCRA बिल जेपीसी को भेजने की तैयारी! सरकार ने दिए बड़े संकेत
विपक्षी दलों और कई राज्य स्तरीय नेताओं के भारी विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं, हालांकि विपक्ष इस विधेयक को पूरी तरह वापस लेने पर अड़ा हुआ है।

केंद्र सरकार विवादित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026) को संसद में आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में न तो FCRA बिल और न ही परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को कार्यसूची में शामिल किया गया था।
विपक्षी दलों और कई राज्य स्तरीय नेताओं के भारी विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं, हालांकि विपक्ष इस विधेयक को पूरी तरह वापस लेने पर अड़ा हुआ है।
संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से प्रयास तेज हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात की है। इससे पहले, रिजिजू लगातार विपक्षी नेताओं से भी संपर्क साध रहे थे, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाई जा सके।
जहां एक तरफ सरकार FCRA बिल को संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का विकल्प देख रही है, वहीं विपक्षी दल इस पर राजी नहीं हैं। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि बिल को सिर्फ समीक्षा के लिए भेजना काफी नहीं है, बल्कि सरकार को इसे पूरी तरह से वापस करना होगा।
क्या है FCRA संशोधन विधेयक 2026 और विवाद?
यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन अलग-अलग हितधारकों और सामाजिक संगठनों के कड़े विरोध के बाद इसे रोक दिया गया था। उनकी मुख्य चिंता हैं- विदेशी फंडिंग के नियमों को कड़ा करना; धारा 15 (Section 15) को निरस्त करने की मांग।
DMK, NCP और ईसाई संगठनों का कड़ा रुख
विधेयक का विरोध केवल पारंपरिक विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दलों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा कि सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिल को वापस लेने और मौजूदा कानून की धारा 15 को निरस्त करने की मांग की है।
परिसीमन विधेयक पर केंद्र सरकार को द्रमुक के समर्थन की जरूरत हो सकती है, ऐसे में FCRA बिल पर DMK का रुख सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।
NCP (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि हर विदेशी फंडिंग को हमेशा शक की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को या तो इसे वापस लेना चाहिए या जेपीसी के पास भेजना चाहिए।
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और प्रमुख ईसाई सामाजिक संगठनों ने भी केंद्र सरकार से इस विधेयक को जेपीसी को सौंपने की अपील की है।


