
मनरेगा स्कीम का नाम बदलने की कैसे अचानक शुरू हो गई चर्चा
मनरेगा योजना यूपीए-1 सरकार की एक महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना थी। इसे साल 2005 में लागू किया गया था। अब इस योजना का नाम बदलने की चर्चा शुरू हो गई है।
यूपीए सरकार की सबसे अहम योजनाओं में से एक मनरेगा का नाम बदलने की अचानक शुक्रवार को चर्चा शुरू हो गई। मीडिया संस्थानों में दावा किया गया कि केंद्र सरकार इस योजना का नाम महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लोएमेंट गारंटी एक्ट 2025 (MGNREGA) से बदलकर पूज्य बापू रूरल एम्प्लोएमेंट गारंटी बिल 2025 रख सकती है। 'मनी कंट्रोल' ने भी सूत्रों के हवाले से शुक्रवार को यह जानकारी दी है। जल्द ही नए नाम को कैबिनेट में मंजूरी दी जा सकती है। हालांकि, सरकार ने आधिकारिक रूप से नाम बदलने की पुष्टि नहीं की है।
पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज (12 दिसंबर) को केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। साथ ही, केंद्रीय कैबिनेट विकास भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 को भी मंजूरी दे सकती है। इसका मकसद शिक्षा क्षेत्र में सुधार करना है।
बता दें कि मनरेगा योजना यूपीए-1 सरकार की एक महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना थी। इसे साल 2005 में लागू किया गया था। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हर परिवार के व्यस्क सदस्यों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी मिलती है।
योजना को ग्रामीण बेरोजगारी कम करने के उद्देश्य से लाया गया था। यह योजना ग्रामीण विकास कार्यों को बढ़ावा देने और गरीब परिवारों को नियमित आय का सोर्स देती थी। इसके तहत ज्यादातर काम जल-संरक्षण, भूमि सुधार, सड़क निर्माण, वृक्षारोपण से जुड़े होते हैं।

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
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